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विश्वास का सौदागर निकला गबन का खिलाड़ी! बैंक मैनेजर ने पत्नी के खाते में पहुंचाए लाखों रुपये, EOW ने दर्ज किया केस

EOW का बड़ा खुलासा: बैंक मैनेजर ने सिस्टम में लगाई सेंध, पत्नी के खाते में पहुंचाए लाखों रुपये, भ्रष्टाचार का केस दर्ज

जबलपुर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बैंकिंग व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बेनीखेड़ा शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक प्रीतम कुमार बेहरा के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और पद के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने स्व-सहायता समूहों, बीमा और ऋण खातों से कुल 6 लाख 2 हजार 558 रुपये का कथित रूप से अवैध हस्तांतरण कर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया। मामले में EOW ने अपराध दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए प्रकरण भोपाल मुख्यालय भेज दिया है।

जांच में सामने आया कि आरोपी प्रीतम कुमार बेहरा ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थ कर्मचारियों अक्षत जैन और उमेश चतुरकर की लॉगिन आईडी का उपयोग किया। इसके माध्यम से 09 स्व-सहायता समूह (SHG) के खातों से 4 लाख 21 हजार 108 रुपये अपनी पत्नी मोनालीसा बेहरा के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा लेन-देन कथित रूप से बिना खाताधारकों की जानकारी और अनुमति के किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बैंक के आउटसोर्स कर्मचारी मनोज कुमार चक्रवर्ती के नाम पर कथित रूप से एक फर्जी बैंक खाता खुलवाया। इसके बाद उसी खाते की एटीएम और मोबाइल बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग कर 1 लाख 43 हजार 480 रुपये निकाल लिए। इसके अलावा लोक अदालत के दौरान चार एनपीए खातों से प्राप्त 38 हजार रुपये की नकद राशि भी बैंक में जमा नहीं की गई और कथित रूप से उसका दुरुपयोग किया गया।

इस पूरे कथित फर्जीवाड़े का खुलासा बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अंचल कार्यालय, जबलपुर के शाखा प्रबंधक गोविंद सिंह ठाकुर की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत मिलने पर भोपाल मुख्यालय ने मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद EOW की निरीक्षक भुवनेश्वरी चौहान ने विस्तृत जांच की। निरीक्षक भुवनेश्वरी चौहान ने बैंक के दस्तावेजों, लेन-देन के रिकॉर्ड, कर्मचारियों और गवाहों के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान कई ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए जो कथित रूप से ग्राहकों की सहमति के बिना किए गए थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इन संदिग्ध ट्रांजेक्शनों से जुड़े वाउचर और आवश्यक बैंक रिकॉर्ड शाखा में उपलब्ध नहीं मिले, जिससे अनियमितताओं की पुष्टि को बल मिला।

EOW ने आरोपी प्रीतम कुमार बेहरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 316(5), 318(4) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(C), 13(1)(A) और 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।

फिलहाल EOW पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। जांच पूरी होने के बाद विधि अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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