Crime ReportsCrime ReportsIndiaJabalpurLatest NewsMP

श्रीराम कॉलेज के डायरेक्टर करसौलिया पर लगे गंभीर आरोपों से उठे सवाल, पुराने मामलों की भी होने लगी चर्चा

शोषण के आरोपों को लेकर जांच की मांग, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से जुड़े दावों ने बढ़ाई चिंता

SET NEWS, जबलपुर। माढ़ोताल स्थित श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े फीस विवाद में मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर कॉलेज प्रबंधन की शिकायत पर फीस की राशि में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर एफआईआर दर्ज हुई है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोक सिंह ठाकुर अपने पुत्र चंद्रमोहन सिंह ठाकुर के खिलाफ दर्ज प्रकरण को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। अब इस पूरे विवाद के बीच कॉलेज प्रबंधन और संस्थान से जुड़े लोगों को लेकर पूर्व में लगाए गए कुछ गंभीर आरोप भी चर्चा में आने लगे हैं।
फीस प्रकरण में आमने-सामने दो पक्ष-
कॉलेज प्रबंधन की ओर से फीस संबंधी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर अधिवक्ता त्रिलोक सिंह ठाकुर का दावा है कि उनके पुत्र को साजिश के तहत मामले में फंसाया गया है। उनका कहना है कि बैंक खातों, संस्थान से जुड़े लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। अधिवक्ता पक्ष ने मामले में उच्चस्तरीय जांच अथवा एसआईटी गठित किए जाने की मांग भी रखी है। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
अब पुराने आरोपों को लेकर भी उठ रहे सवाल-
फीस विवाद के बीच कॉलेज के डायरेक्टर आर.के. करसौलिया से जुड़े कुछ पुराने आरोप भी चर्चा में हैं। कुछ लोगों की ओर से पूर्व में कॉलेज से जुड़े छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों के साथ कथित शोषण तथा दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन आरोपों को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि पूर्व में इस संबंध में पुलिस शिकायत, लिखित आवेदन, जांच रिपोर्ट या न्यायालयीन दस्तावेज मौजूद हैं तो उनकी जांच इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से जुड़े दावों की भी जांच जरूरी-
कुछ लोगों का दावा है कि संस्थान में पूर्व में भी कुछ छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने प्रबंधन के व्यवहार को लेकर आपत्ति जताई थी। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ लोगों ने अपनी पढ़ाई, डिग्री, नौकरी अथवा पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कथित घटनाओं को सार्वजनिक नहीं किया। इन दावों की पुष्टि किए बिना इन्हें तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। ऐसे में यदि कोई पूर्व शिकायत या पीड़ित पक्ष सामने आता है तो उसके बयान, उपलब्ध दस्तावेज और संबंधित रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होगी।
संस्थान के अंदरूनी विवादों की भी चर्चा-
कॉलेज से जुड़े लोगों के बीच संस्थान के प्रशासन और नियंत्रण को लेकर अंदरूनी मतभेद होने की बातें भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे कथित मतभेदों का असर संस्थान के प्रशासन और वहां कार्यरत शिक्षकों पर पड़ता है। हालांकि परिवार के सदस्यों के बीच कथित विवाद और उसके शिक्षकों पर प्रभाव संबंधी दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इस संबंध में संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
सवाल यह भी यदि शिकायतें थीं तो जांच क्यों नहीं?-
पूरे मामले में अब एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि संस्थान से जुड़े लोगों के खिलाफ पूर्व में शिकायतें या गंभीर आरोप लगाए गए थे, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? क्या कभी स्वतंत्र जांच कराई गई? क्या कॉलेज में कर्मचारियों और विद्यार्थियों की शिकायतों के लिए कोई औपचारिक व्यवस्था है? और क्या फीस तथा अन्य वित्तीय लेनदेन का नियमित स्वतंत्र ऑडिट होता रहा? इन सवालों के जवाब दस्तावेजों और आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट हो सकते हैं।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर-
फिलहाल श्रीराम कॉलेज विवाद में एक तरफ फीस और वित्तीय लेनदेन को लेकर एफआईआर है, दूसरी तरफ एफआईआर को कथित रूप से फर्जी बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग है। इसके साथ ही संस्थान से जुड़े पुराने आरोपों की चर्चा ने मामले को और व्यापक बना दिया है।
ऐसे में पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों के सामने बैंक स्टेटमेंट, फीस रिकॉर्ड, रसीदें, छात्रों एवं कर्मचारियों के बयान, पूर्व शिकायतें और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल इस पूरे मामले में आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है और वास्तविक तस्वीर निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी।
Sunil Sen SET NEWS, 7974423030

Related Articles