पत्रकारिता में दखल नहीं चलेगा! कवरेज रोकने, धमकाने और वीडियो डिलीट कराने पर कानूनी कार्रवाई
पत्रकारों के लिए जारी पत्र में BNS और IT Act की धाराओं का उल्लेख, खबर रोकने की कोशिश करने वालों को कानून की जानकारी

जबलपुर। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती, धमकी या बाधा गंभीर विषय बन जाती है। इसी को लेकर पत्रकारों के लिए जारी एक महत्वपूर्ण पत्र में कवरेज के दौरान सामने आने वाली परिस्थितियों और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई है।
कवरेज रोका तो बन सकता है कानूनी मामला,
पत्र में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकार को खबर, फोटो या वीडियो बनाने से रोकता है, रास्ता बाधित करता है या जबरदस्ती कवरेज बंद कराने का प्रयास करता है, तो परिस्थितियों के अनुसार BNS की धारा 126, 127 और 221 जैसे प्रावधानों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि किसी मामले में कौन-सी धारा लगेगी, यह घटना के वास्तविक तथ्यों और जांच पर निर्भर करेगा।
कैमरा छीना या रिकॉर्डिंग डिलीट कराई तो मामला गंभीर,
पत्र में कैमरा या अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा रिकॉर्डिंग को जबरन हटाने के प्रयास को लेकर भी कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। BNS की धारा 324, 303/306 और 316 सहित परिस्थितिनुसार अन्य प्रावधानों का जिक्र किया गया है। साथ ही कुछ परिस्थितियों में IT Act की धारा 66E और 67 का भी उल्लेख किया गया है।
धमकी और मारपीट पर भी कार्रवाई का प्रावधान,
पत्र में पत्रकार को धमकाने, गाली-गलौज करने, हाथापाई या चोट पहुंचाने जैसी घटनाओं के संबंध में BNS की धारा 351, 352, 115(2) और 117 का उल्लेख किया गया है। संदेश साफ है कि पत्रकार के साथ होने वाली किसी भी घटना में शिकायत करते समय घटना का पूरा विवरण, उपलब्ध वीडियो, फोटो और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।
जबरदस्ती वीडियो डिलीट कराने की कोशिश पर सवाल,
कवरेज के दौरान किसी पत्रकार के मोबाइल या कैमरे से रिकॉर्डिंग जबरन डिलीट कराने की कोशिश हो तो घटना की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसलिए पत्रकारों को अपनी रिकॉर्डिंग और मूल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा किसी विवाद की स्थिति में उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी गई है।
FIR में घटना का पूरा विवरण दर्ज कराना जरूरी,
पत्र में FIR के लिए एक प्रारूप भी दिया गया है, जिसमें पत्रकार द्वारा यह स्पष्ट रूप से बताने की बात कही गई है कि वह समाचार कवरेज कर रहा था और आरोपी ने उसे कवरेज से रोका, धमकाया, गाली-गलौज या हाथापाई की अथवा कैमरा तोड़ने या वीडियो डिलीट कराने का प्रयास किया।
पत्रकारों को अपने अधिकार और जिम्मेदारियां दोनों समझनी होंगी,
यह संदेश केवल पत्रकारों के अधिकारों की जानकारी तक सीमित नहीं है। पत्रकारों के लिए भी जरूरी है कि वे कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष तरीके से समाचार संकलन करें। वहीं दूसरी ओर किसी व्यक्ति को भी पत्रकार के साथ हिंसा, धमकी या जबरदस्ती करने का अधिकार नहीं है। विवाद की स्थिति में कानून के अनुसार शिकायत और जांच का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
खबर रोकने के बजाय कानून का रास्ता अपनाएं,
पत्र का मूल संदेश यही है कि पत्रकार को कवरेज से रोकने के लिए धमकी, हिंसा या जबरदस्ती का सहारा लेने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए। वहीं पत्रकारों को भी अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों की जानकारी होना जरूरी है। किसी घटना में धाराओं का अंतिम निर्धारण पुलिस की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।



