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सफेद कोट के पीछे सियासत”: मेडिकल में नेताओं की दखल, ठेका कर्मियों पर दबाव

सफेद कोट के पीछे सियासत”: मेडिकल में नेताओं की दखल, ठेका कर्मियों पर दबाव

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल से सामने आ रही तस्वीरें और जानकारी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। जहां एक ओर मरीजों की सेवा को सर्वोपरि होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के अंदर सियासी दखलअंदाजी हावी होती नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ नेता प्राइवेट ठेका कंपनियों पर अपना प्रभाव जमाकर न सिर्फ नियुक्तियों में दखल दे रहे हैं, बल्कि ड्यूटी शिफ्ट तक तय कर रहे हैं। अपने करीबियों को नौकरी दिलवाकर उन्हें मनमुताबिक काम और समय दिया जा रहा है, जबकि बाकी ठेका कर्मी असमानता और दबाव के बीच काम करने को मजबूर हैं।
हैरानी की बात यह है कि नेताओं के चहेते कर्मचारियों की ड्यूटी महीनों तक नहीं बदली जाती, जिससे अन्य कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। जो कर्मी दिन-रात मेहनत कर अस्पताल की व्यवस्था संभाल रहे हैं, वही सबसे ज्यादा उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
अस्पताल के अधिकारी और स्टाफ भी इस दबाव से अछूते नहीं हैं। अंदरखाने यह माना जा रहा है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण प्रशासनिक फैसले निष्पक्ष तरीके से नहीं लिए जा पा रहे। नतीजा—व्यवस्था पर असर और मरीजों की सेवा पर भी सवाल।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की सियासत हावी रहनी चाहिए? अगर यही हाल रहा, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होगा, जो इलाज के भरोसे यहां आते हैं।
ये खबर सिर्फ एक अस्पताल की नहीं, बल्कि सिस्टम में बढ़ती उस सच्चाई की झलक है, जहां मेहनत करने वाले पीछे और प्रभावशाली आगे नजर आते हैं।

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