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हौसलों की उड़ान: शारीरिक चुनौतियों को हराकर डिप्टी कलेक्टर बने हिमांशु सोनी, पहले ही दिन निभाई जनसेवा की जिम्मेदारी

हौसलों की उड़ान: शारीरिक चुनौतियों को हराकर डिप्टी कलेक्टर बने हिमांशु सोनी, पहले ही दिन निभाई जनसेवा की जिम्मेदारी

SET NEWS जबलपुर सुनील सेन! कहते हैं कि इंसान की असली ताकत उसके शरीर में नहीं, बल्कि उसके हौसलों और इरादों में होती है। जब इरादे बुलंद हों और मंजिल पाने का जज्बा दिल में हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती भी रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है जबलपुर से, जहां शारीरिक अक्षमता को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि संघर्ष की ताकत बनाकर हिमांशु सोनी ने डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना साकार किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

जबलपुर कलेक्ट्रेट में पदभार ग्रहण करने के पहले ही दिन हिमांशु सोनी ने अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने की शुरुआत कर दी। उन्होंने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के साथ जनसुनवाई में हिस्सा लिया और आम नागरिकों की समस्याओं को बेहद करीब से सुना। जनसुनवाई के दौरान बिजली, ऊर्जा, शिक्षा और अन्य विभागों से जुड़ी शिकायतों को समझते हुए उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव लिया। यह उनकी कार्यशैली का परिचायक है कि उन्होंने पहले ही दिन जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने को प्राथमिकता दी।

हिमांशु सोनी ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे किसी बड़े संस्थान की कोचिंग नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और लगातार की गई मेहनत है। उन्होंने घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम से मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी की। सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। साक्षात्कार के लिए वे इंदौर पहुंचे और अपने प्रदर्शन के दम पर वर्ष 2024 बैच में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए।

हिमांशु का कहना है कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उसे सीख के रूप में स्वीकार करना चाहिए। निरंतर अभ्यास, धैर्य और आत्मविश्वास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं।

इस उपलब्धि से सबसे अधिक भावुक और गौरवान्वित उनके पिता महेंद्र सोनी नजर आए। उन्होंने कहा कि बेटे ने बचपन से ही अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। परिवार ने हर कदम पर उसका साथ दिया। पढ़ाई के लिए किताबों की व्यवस्था हो, ऑनलाइन कोर्स हों या अन्य जरूरी संसाधन—हर जरूरत को पूरा करने का प्रयास किया गया। आज उसी संघर्ष और मेहनत का परिणाम पूरे परिवार के सामने है।

महेंद्र सोनी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए अपनी भावनाएं एक कविता के माध्यम से व्यक्त कीं। उन्होंने कहा—
“ख्वाहिशों से नहीं गिरते फूल झोली में, कर्म की शाख को हिलाना होगा। कुछ नहीं होगा अंधेरों को कोसने से, अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना होगा।”
उनकी ये पंक्तियां इस बात को साबित करती हैं कि सफलता केवल सपने देखने से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और कर्म से हासिल होती है।

हिमांशु सोनी की यह सफलता केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग की प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि शारीरिक चुनौतियां किसी इंसान की क्षमता का पैमाना नहीं होतीं। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है।

आज जबलपुर का यह युवा अधिकारी हजारों विद्यार्थियों और युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। हिमांशु सोनी की कहानी हमें यही संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि हौसले बुलंद हों, मेहनत सच्ची हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है।

 

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