112 को पुकारा, साइबर सेल से मांगी मदद… फिर भी रातभर बेबस रही महिला! CCTV ने खोली बदमाशों की पोल, सिस्टम पर सवाल
रात 9 बजे मोबाइल झपटा, घंटों नहीं पहुंची मदद—गढ़ा थाना क्षेत्र की वारदात में अपराधियों के साथ 112 और साइबर सेल की कथित लापरवाही भी सवालों के घेरे में

जबलपुर। गढ़ा थाना क्षेत्र के ज्योति नगर-छोटी बजरिया इलाके में महिला से मोबाइल झपटमारी की वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन पुलिस सहायता प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात करीब 9 बजे घर के बाहर टहल रही शिवानी वर्मा को मोपेड सवार तीन युवकों ने कथित तौर पर निशाना बनाया। रास्ता पूछने के बहाने बातचीत शुरू करने के बाद आरोपियों ने महिला को धक्का दिया और हाथ से मोबाइल झपटकर फरार हो गए।
घटना के बाद पीड़िता ने तत्काल 112 पर फोन कर मदद मांगने का दावा किया, लेकिन उनके अनुसार काफी समय तक मौके पर पुलिस सहायता नहीं पहुंची। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि मोबाइल से संबंधित मदद के लिए साइबर सेल से संपर्क करने के बावजूद उन्हें तत्काल सहायता नहीं मिली।
महिला को धक्का दिया और मोबाइलमहिला लेकर भागे बदमाश,
पीड़िता के मुताबिक वह रात करीब 9 बजे अपने घर के बाहर मोबाइल पर बात करते हुए टहल रही थीं। तभी मोपेड सवार तीन युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने रास्ता पूछने के बहाने महिला को रोका और बातचीत शुरू की।
कुछ ही क्षण बाद आरोपियों ने महिला को धक्का दिया और उनके हाथ से मोबाइल छीन लिया। अचानक हुए हमले से महिला सड़क पर गिर गईं। उन्होंने शोर मचाते हुए आरोपियों का पीछा करने का प्रयास किया, लेकिन तीनों बदमाश मोपेड से फरार हो गए।
112 पर कॉल के बाद भी पुलिस सहायता पर सवाल,
घटना के बाद पीड़िता ने 112 पर कॉल करने की बात कही है। लेकिन उनका आरोप है कि कॉल करने के बावजूद उन्हें तत्काल पुलिस सहायता नहीं मिली।
यही सवाल अब व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है—अगर आपातकालीन हेल्पलाइन पर रात 9 बजे सूचना दी गई थी, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या कॉल संबंधित पुलिस टीम तक पहुंची? क्या मौके पर पुलिस भेजी गई? अगर भेजी गई तो पुलिस पहुंची क्यों नहीं? और अगर कॉल पर कार्रवाई नहीं हुई तो इसकी जवाबदेही किसकी है?
साइबर सेल से मदद नहीं मिलने का भी आरोप,
मोबाइल झपटमारी के बाद पीड़िता के लिए मोबाइल को सुरक्षित कराना और तकनीकी सहायता हासिल करना महत्वपूर्ण था। पीड़िता का आरोप है कि साइबर सेल से संपर्क के बावजूद उन्हें तत्काल सहायता नहीं मिली। अब यह भी जांच का विषय है कि घटना की सूचना मिलने के बाद साइबर सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया क्या रही और पीड़िता को तत्काल मदद क्यों नहीं मिल सकी।
रात में थाना पुलिस का फोन, सुबह दर्ज हुई शिकायत,
पीड़िता के अनुसार रात में बाद में गढ़ा थाना पुलिस की ओर से उन्हें फोन आया। उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद सुबह वह थाने पहुंचीं और अपनी शिकायत दर्ज कराई। घटना और शिकायत के बीच हुए इस पूरे घटनाक्रम ने 112 से थाना पुलिस तक सूचना पहुंचने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CCTV ने सामने ला दी पूरी वारदात,
घटना से संबंधित CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामले को लेकर तस्वीर और साफ हुई। फुटेज में मोपेड सवार तीन युवक दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अब CCTV के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और उनके वाहन की जानकारी जुटाने में लगी है।
अब बदमाशों की गिरफ्तारी के साथ सिस्टम की जांच भी जरूरी,
इस मामले में सबसे पहले उन आरोपियों तक पहुंचना जरूरी है जिन्होंने महिला को निशाना बनाया। लेकिन इसके साथ ही पीड़िता द्वारा लगाए गए 112 और साइबर सेल की कथित लापरवाही के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।
एक तरफ बदमाश खुलेआम महिला से मोबाइल झपटकर फरार हो गए, दूसरी तरफ अगर मदद के लिए की गई कॉल के बाद भी घंटों तक सहायता नहीं मिली, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आपातकालीन पुलिस व्यवस्था आखिर किसके लिए है?
फिलहाल गढ़ा थाना पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है और CCTV फुटेज के आधार पर अज्ञात आरोपियों की तलाश की जा रही है।
अब देखना होगा कि पुलिस बदमाशों को कितनी जल्दी गिरफ्तार करती है और 112 व साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों की जांच कर जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।



