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250 लोगों की बैठक, पुलिस-प्रशासन की सख्त चेतावनी! फिर भी DJ संचालकों को कानून का डर नहीं? दुर्गोत्सव में नियम टूटे तो जिम्मेदार कौन?

SP सम्पत उपाध्याय के निर्देश पर हुई बैठक, लिखित वचनपत्र भी लिया—अब नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की बारी!

जबलपुर। दुर्गोत्सव में ध्वनि प्रदूषण रोकने और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन ने DJ, साउंड और लाइट संचालकों को साफ शब्दों में चेतावनी दी थी। पुलिस कंट्रोल रूम में करीब 250 लोगों की मौजूदगी में बैठक आयोजित की गई। नियम समझाए गए, सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए गए और पालन का वचनपत्र भी लिया गया। इसके बावजूद यदि प्रतिबंधित DJ बजाने या तय मानकों की अनदेखी की शिकायतें सामने आती हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है—क्या कुछ संचालकों पर प्रशासन की चेतावनी का असर नहीं हो रहा?

DJ पर प्रतिबंध, साउंड सिस्टम के लिए अनुमति अनिवार्य,
2 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे आयोजित बैठक में पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष जाखड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जोन-4 अंजना तिवारी, एडीएम रविशंकर राय और शैलेन्द्र सिंह सहित पुलिस, प्रशासन तथा विद्युत विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में स्पष्ट किया गया कि DJ प्रतिबंधित रहेगा और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल निर्धारित अनुमति व शर्तों के अनुसार ही किया जाएगा।

दो से ज्यादा स्पीकर बॉक्स नहीं, आवाज की सीमा का भी पालन जरूरी,
प्रशासन ने निर्देश दिए कि झांकियों, स्वागत मंचों और चल समारोहों में दो से अधिक स्पीकर बॉक्स का उपयोग न हो। बॉक्स का व्यास 12 इंच से अधिक न रखा जाए और ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा के भीतर रहे। चोंगों के इस्तेमाल पर रोक, धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले गानों से परहेज और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन करने की हिदायत भी दी गई।

बिजली के तारों में लापरवाही हुई तो हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सिर्फ आवाज ही नहीं, सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए। कटे-फटे तारों का इस्तेमाल नहीं करने, जनरेटर को सुरक्षित रखने और अवैध कटिया कनेक्शन से बचने को कहा गया। शॉर्ट सर्किट या करंट फैलने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना संचालकों की भी जिम्मेदारी है। त्योहार के उत्साह में ऐसी लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।

बैठक और वचनपत्र के बाद अब निगरानी की असली परीक्षा,
जब पुलिस और प्रशासन पहले ही नियम बता चुके हैं, तो अब उनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों की है। यदि कहीं प्रतिबंधित DJ बजाने, ध्वनि सीमा तोड़ने या बिजली सुरक्षा के नियमों की अनदेखी की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं—जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए।

जनता को राहत मिलेगी या रातभर तेज आवाज से होगी परेशानी?
दुर्गोत्सव आस्था, भक्ति और उत्सव का पर्व है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आम नागरिकों की नींद, बुजुर्गों की शांति, बच्चों की पढ़ाई और मरीजों के आराम को नजरअंदाज कर दिया जाए। नियम सभी के लिए समान हैं। अब देखना यह है कि पुलिस-प्रशासन मैदान में कितनी प्रभावी निगरानी करता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।

जबलपुर का सवाल: जब बैठक में प्रतिबंध और नियम स्पष्ट कर दिए गए, वचनपत्र भी ले लिया गया, तो अब उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई में ढिलाई क्यों होनी चाहिए? दुर्गोत्सव में आस्था भी जरूरी है और कानून का पालन भी।

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