चालान का ‘टारगेट’ या कानून का डर? जबलपुर की सड़कों पर आम जनता परेशान, थाना पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
चालान का 'टारगेट' या कानून का डर? जबलपुर की सड़कों पर आम जनता परेशान, थाना पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में इन दिनों थाना पुलिस की चालानी कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर के अलग-अलग इलाकों में लगातार वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन इस कार्रवाई को लेकर अब आम लोगों में नाराजगी भी बढ़ती दिखाई दे रही है।
कई वाहन चालकों का आरोप है कि सड़क किनारे खड़े वाहनों पर भी चालान किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि नियमों का पालन कराना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन कार्रवाई का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आम नागरिक खुद को परेशान महसूस करें। खासकर रोज कमाने-खाने वाले लोगों का कहना है कि भारी-भरकम चालान उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई जगहों पर पुलिसकर्मियों ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन बड़ी संख्या में चालान करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी वजह से लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या चालानी कार्रवाई का उद्देश्य सिर्फ नियमों का पालन कराना है या फिर तय संख्या में चालान करना भी प्राथमिकता बन गया है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि कानून सबके लिए बराबर है तो कार्रवाई भी बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए। आम जनता का आरोप है कि अक्सर गरीब और मध्यमवर्गीय लोग कार्रवाई की जद में आते हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ ऐसी सख्ती कम दिखाई देती है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि वाहन चेकिंग अभियान सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए चलाया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
अब सवाल यह है कि क्या चालानी कार्रवाई का तरीका ऐसा हो सकता है जिससे कानून का पालन भी हो और आम जनता को अनावश्यक परेशानी का सामना भी न करना पड़े? यही चर्चा इन दिनों जबलपुर की सड़कों पर सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है।



