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जबलपुर # भगवान भरोसे विद्युत व्यवस्था! कब गुल हो जाए लाइट, कोई पूर्व सूचना नहीं; गर्मी, उमस और कटौती के बीच बेहाल जनता

बिजली के बड़े-बड़े दावे, लेकिन जमीनी हकीकत पर उठ रहे सवाल; उपभोक्ता बोले-शिकायत करें तो सुनता कौन है?

सेटन्यूज़, जबलपुर। स्मार्ट सिटी, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर बुनियादी ढांचे के दावों के बीच जबलपुर की विद्युत व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के अनेक इलाकों में बिना पूर्व सूचना के बिजली गुल होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। भीषण गर्मी और उमस के दौर में अचानक घंटों तक बिजली बाधित रहने से आम नागरिकों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शहरवासियों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या केवल बिजली कटौती नहीं, बल्कि उसके संबंध में समय पर सूचना का अभाव है। कई बार लोग घरों, दुकानों और कार्यालयों में अपने जरूरी कार्यों के बीच बिजली गुल होने से असहाय महसूस करते हैं। नागरिकों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कई मामलों में स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

हाल के महीनों में जबलपुर में बिजली आपूर्ति से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। मई 2026 में माधोताल सब-स्टेशन से जुड़े एक विवाद के कारण लगभग 10 हजार उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी और कई फीडरों को बंद करना पड़ा था।

बिजली विभाग के आंकड़े बताते हैं कि गर्मी के मौसम में जबलपुर में विद्युत मांग में लगभग 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती मांग के कारण वितरण नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है और विभाग को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।

दूसरी ओर, सोशल मीडिया और स्थानीय ऑनलाइन मंचों पर भी उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में कर्मेटा, अधारताल, बिलहरी और मेडिकल क्षेत्र सहित विभिन्न इलाकों से घंटों तक बिजली बाधित रहने की शिकायतें दर्ज की गईं। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि शिकायत करने के बाद भी उन्हें बिजली बहाली के समय को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी, लगातार बढ़ती बिजली खपत, पुराने वितरण तंत्र, मौसम संबंधी व्यवधान और कई स्थानों पर अवैध निर्माण तथा तकनीकी चुनौतियां विद्युत आपूर्ति को प्रभावित कर रही हैं। प्रदेश में उच्च वोल्टेज लाइनों के आसपास बड़ी संख्या में अवैध संरचनाएं और ट्रांसमिशन ढांचे के निकट अनधिकृत खुदाई को भी भविष्य के बड़े ब्लैकआउट का कारण माना जा रहा है।

जनता का कहना है कि बिजली बिल समय पर जमा कराने वाले उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा मिलनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि रखरखाव कार्य चल रहे हैं तो उनकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी जाती और यदि तकनीकी खराबी है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती। नागरिकों का मानना है कि डिजिटल युग में एसएमएस, मोबाइल एप और सोशल मीडिया के माध्यम से तत्काल सूचना देना कोई कठिन कार्य नहीं है।

शहर में यह चर्चा भी तेज है कि बिजली कटौती और ट्रिपिंग की समस्या केवल मौसम खराब होने पर ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी देखने को मिल रही है। ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि करोड़ों रुपये के रखरखाव और आधुनिकीकरण कार्यों का वास्तविक लाभ आम उपभोक्ताओं तक कब पहुंचेगा।

फिलहाल जबलपुर की बड़ी आबादी इसी उम्मीद में है कि आने वाले मानसून सीजन से पहले विद्युत व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाया जाएगा। क्योंकि जनता का मानना है कि आधुनिक शहर की पहचान केवल ऊंचे दावों से नहीं, बल्कि चौबीसों घंटे भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराने से होती है।

जनता के सवाल
क्या बिजली कटौती की पूर्व सूचना देने की प्रभावी व्यवस्था है? क्या बढ़ती मांग के अनुरूप वितरण तंत्र का विस्तार किया गया है? क्या तकनीकी खराबियों के स्थायी समाधान पर पर्याप्त काम हुआ है? क्या उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था वास्तव में प्रभावी है? इन सवालों के जवाब अब केवल विभाग ही नहीं, बल्कि शहर की जनता भी जानना चाहती है।

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