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अपने ही घर में बेगानी हुई मां: बेटे-बहू के अत्याचार से टूटी बुजुर्ग महिला की हिम्मत, न्याय की आस में पहुंची एसपी दफ्तर

अपने ही घर में बेगानी हुई मां: बेटे-बहू के अत्याचार से टूटी बुजुर्ग महिला की हिम्मत, न्याय की आस में पहुंची एसपी दफ्तर

जबलपुर में एक ऐसी दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसने रिश्तों की नींव को झकझोर कर रख दिया है। जिस मां ने अपने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, आज वही मां अपने ही घर में पराई बना दी गई है। तिलवारा थाना क्षेत्र के लम्हेटा मोड़ सगरा की रहने वाली बुजुर्ग महिला रामरति चंद्रोल इन दिनों अपने ही बेटे और बहू के अत्याचारों से जूझ रही हैं।

रामरति चंद्रोल की आंखों में आंसू और आवाज में दर्द साफ झलकता है। उन्होंने बताया कि उनके पति गढ़ा थाना में पुलिस इंस्पेक्टर थे। उनके निधन के बाद उम्मीद थी कि बेटा सहारा बनेगा, लेकिन हालात इसके बिल्कुल उलट हो गए। उनका आरोप है कि बेटा आशीष चंद्रोल और बहू ऋतु चंद्रोल अब उनके ही मकान पर कब्जा करने की नीयत से उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं।

बुजुर्ग महिला के अनुसार, 15 तारीख को उनकी बहू ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उनकी सोने की चैन और तुलसी की माला तक खींच ली गई। यह सिर्फ शारीरिक पीड़ा नहीं थी, बल्कि एक मां के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला क्षण था। जब उनकी बेटी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उसे भी नहीं बख्शा गया—उसके साथ भी मारपीट की गई, यहां तक कि उसके बाल तक नोच डाले गए।

रामरति चंद्रोल का कहना है कि उनका चार कमरों का मकान अब बेटा-बहू ने अपने कब्जे में ले लिया है और उन्हें लगातार घर से निकालने की धमकियां दी जा रही हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद जब कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो आखिरकार वे अपनी बेटी के साथ एसपी कार्यालय पहुंचीं और न्याय की गुहार लगाई।

उनकी बस एक ही मांग है—उन्हें अपने ही घर में सम्मान और शांति से जीने का अधिकार मिले।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है—क्या आज के दौर में मां-बाप अपने ही बच्चों के बीच सुरक्षित नहीं हैं?

अब नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। क्या इस बुजुर्ग मां को न्याय मिलेगा, या फिर वह यूं ही अपने ही घर में बेगानी बनकर रह जाएंगी?

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