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गोलीकांड में गिरफ्तारी कब? पाटन पुलिस की सुस्ती पर पीड़ित ने ASP से लगाई गुहार

FIR के बाद भी गिरफ्तारी नहीं! पाटन गोलीकांड में पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

जबलपुर के पाटन थाना क्षेत्र के ग्राम खमदेही में 30 मई 2026 को देवेन्द्र रैकवार पर गोली चलाकर जान से मारने के प्रयास के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर पीड़ित परिवार लगातार पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रहा है। मामले में थाना पाटन में FIR क्रमांक 0338/2026 दर्ज होने के बावजूद आरोपी रामनारायण पटेल के फरार बताए जाने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

FIR दर्ज, फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं?
पीड़ित पक्ष का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गंभीर घटना को लेकर FIR दर्ज हो चुकी है, तो आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है? पीड़ित का कहना है कि आरोपी के खुले में रहने से परिवार के बीच भय का माहौल बना हुआ है। हालांकि गिरफ्तारी में देरी के वास्तविक कारण पुलिस की ओर से स्पष्ट किए जाने बाकी हैं।

पाटन थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल,
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले में पुलिस से जिस तेजी और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद थी, वह नजर नहीं आ रही। गोलीकांड जैसे गंभीर आरोपों वाले मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए पर्याप्त प्रयास किए? क्या संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई? इन सवालों का जवाब पुलिस को देना चाहिए।

पीड़ित ने ASP के सामने रखी परेशानी,
लगातार गिरफ्तारी की मांग को लेकर देवेन्द्र रैकवार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा को ज्ञापन सौंपा। पीड़ित ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी, मामले की उच्च स्तर से निगरानी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। इससे साफ है कि पीड़ित अब स्थानीय स्तर की कार्रवाई से आगे वरिष्ठ अधिकारियों का हस्तक्षेप चाहता है।

परिवार को सुरक्षा का डर,
पीड़ित पक्ष ने आशंका जताई है कि आरोपी के बाहर रहने से उसके और उसके परिवार की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। साथ ही गवाहों पर दबाव बनाने अथवा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका भी जताई गई है। इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन गंभीर मामले में पुलिस के लिए इन आशंकाओं की जांच करना महत्वपूर्ण है।

पुलिस की देरी से बढ़ रहे सवाल,
गोली चलाकर जान से मारने के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर यह सवाल उठना लाजिमी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच पा रही है, तो इसके पीछे क्या तकनीकी, कानूनी या अन्य कारण हैं? पाटन थाना पुलिस को कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार और आम लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।

क्या वरिष्ठ अधिकारी लेंगे मामले का संज्ञान?
अब पीड़ित परिवार की उम्मीद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर टिकी है। ASP सूर्यकांत शर्मा को ज्ञापन दिए जाने के बाद यह देखना अहम होगा कि मामले में क्या निर्देश दिए जाते हैं। यदि जांच की निगरानी वरिष्ठ स्तर से होती है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं, तो पीड़ित परिवार को राहत मिल सकती है।

पाटन पुलिस पर लापरवाही के आरोप, लेकिन जांच जरूरी,
पीड़ित की ओर से पुलिस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिन्हें फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। पुलिस की वास्तविक लापरवाही या किसी स्तर पर चूक हुई है या नहीं, यह जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना जरूर है कि FIR के बाद भी आरोपी का फरार रहना पुलिस के सामने चुनौती और जनता के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है।

अब जवाब कार्रवाई से मिलेगा,
पाटन गोलीकांड में पीड़ित परिवार चाहता है कि आरोपी रामनारायण पटेल की जल्द गिरफ्तारी हो और मामले की निष्पक्ष जांच आगे बढ़े। अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पाटन थाना पुलिस क्या कदम उठाती है। फिलहाल FIR के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों का जवाब केवल ठोस और पारदर्शी कार्रवाई से ही मिल सकेगा।

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