पुलिस पर हमला या सिस्टम की नाकामी? आखिर किसके संरक्षण में बेखौफ हो रहे अपराधी
पुलिस पर हमला या सिस्टम की नाकामी? आखिर किसके संरक्षण में बेखौफ हो रहे अपराधी

सीधी। कमर्जी थाना क्षेत्र के ग्राम पटपरा में थाना प्रभारी पर हुआ जानलेवा हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोर होती पकड़ का आईना है। जब कानून का पालन कराने पहुंचे पुलिस अधिकारी पर ही धारदार हथियारों से हमला हो जाए, तो यह साफ संकेत है कि अपराधियों के हौसले अब खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके हैं।
थाना प्रभारी इंद्राज सिंह अपनी ड्यूटी निभाते हुए सड़क जाम हटाने और शांति व्यवस्था कायम करने पहुंचे थे। लेकिन समझाइश का जवाब उन्हें हिंसा के रूप में मिला। टांगी और हंसिए से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। यह घटना बताती है कि अब अपराधी न सिर्फ कानून तोड़ रहे हैं, बल्कि कानून के रक्षकों को भी निशाना बना रहे हैं।
अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर अपराधियों को इतनी हिम्मत मिलती कहां से है?
क्या यह सिर्फ एक भीड़ का गुस्सा था या इसके पीछे किसी प्रकार का संरक्षण?
जब छोटे-छोटे विवादों को समय रहते नहीं सुलझाया जाता…
जब शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाती हैं…
जब रसूखदार लोगों पर कार्रवाई करने में देरी होती है…
तभी अपराधी कानून को कमजोर समझने लगते हैं।
क्या पुलिस पर है दबाव?
जमीनी स्तर पर अक्सर यह चर्चा रहती है कि कुछ मामलों में पुलिस को खुलकर कार्रवाई करने नहीं दिया जाता।
क्या यहां भी ऐसा ही कुछ हुआ?
क्या कुछ अधिकारी या प्रभावशाली लोग ऐसे तत्वों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दे रहे हैं?
अगर पुलिस को पूरी स्वतंत्रता और समर्थन मिले, तो क्या कोई आरोपी इतनी हिम्मत कर सकता है कि थाना प्रभारी पर हमला कर दे?
पुलिस ने दिखाई ताकत, लेकिन…
इस पूरे मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय रही। पांच थानों की टीम ने मिलकर चंद घंटों में ही मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इससे यह साफ है कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे नहीं है।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या हर बार घटना होने के बाद ही कार्रवाई होगी? क्या सिस्टम पहले से सक्रिय होकर ऐसी घटनाओं को रोकने में सक्षम नहीं होना चाहिए?
जवाबदेही तय होना जरूरी
अब जरूरत सिर्फ आरोपियों को सजा देने की नहीं, बल्कि उन कारणों को खत्म करने की है जो अपराध को जन्म देते हैं
जो अधिकारी समय पर कार्रवाई नहीं करते…
जो सिस्टम को ढीला रखते हैं…जो पुलिस पर दबाव बनाकर उसे कमजोर करते हैं…उनकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संदेश साफ होना चाहिए
अगर कानून को मजबूत रखना है, तो पुलिस को खुलकर काम करने देना होगा और अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि कानून से टकराने की कीमत बहुत भारी पड़ेगी।
क्योंकि जब पुलिस ही निशाने पर आ जाए,
तो यह सिर्फ एक हमला नहीं पूरे कानून व्यवस्था पर सीधी चोट होती है।



