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श्रीराम कॉलेज में ‘जिंदगी’ से खिलवाड़! वाटर कूलर में मिला मेंढक, वायरल वीडियो ने खोली प्रबंधन की पोल, 58 लाख के फीस घोटाले पर भी सवाल

छात्रों की सेहत और सुरक्षा पर गंभीर सवाल, एमपीएसयू ने मांगी पूरे परिसर की जांच, वीडियो भेजने वाले विद्यार्थियों पर दबाव बनाने का आरोप

जबलपुर। विवादों के घेरे में चल रहे श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब तक कॉलेज से जुड़े मामले छात्राओं की सुरक्षा, कथित यौन शोषण और फीस की गड़बड़ी को लेकर चर्चा में थे, लेकिन अब एक वायरल वीडियो ने कॉलेज में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं और उनकी सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉलेज के वाटर कूलर में मेंढक दिखाई देने का वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जिस संस्थान में हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का दावा किया जाता है, वहां उन्हें पीने के लिए सुरक्षित पानी तक उपलब्ध है या नहीं?

वाटर कूलर में मेंढक, छात्र बोले जिंदगी का सवाल है-
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे वीडियो में कॉलेज की तीसरी-चौथी मंजिल पर रखे वाटर कूलर के भीतर मेंढक दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो को कॉलेज के ही छात्र-छात्राओं द्वारा बनाया गया बताया जा रहा है। इसमें विद्यार्थी आपस में बातचीत करते हुए इस स्थिति को अपनी जिंदगी और मौत से जुड़ा सवाल बता रहे हैं। वीडियो पर आने वाली प्रतिक्रियाओं में भी कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जाहिर की जा रही है।

यदि वीडियो की पुष्टि होती है तो यह महज साफ-सफाई में लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। जिस पानी को पीकर विद्यार्थी दिनभर कॉलेज में रहते हैं, उसकी स्वच्छता और गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है? वाटर कूलर की नियमित सफाई होती है या नहीं? पेयजल व्यवस्था की जांच की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब कॉलेज प्रबंधन को देना चाहिए।

पहचान छिपाकर एमपीएसयू तक पहुंचाया वीडियो-
मध्य प्रदेश स्टूडेंट यूनियन (एमपीएसयू) के अध्यक्ष अभिषेक पांडे ने वायरल वीडियो मीडिया को उपलब्ध कराते हुए बताया कि कॉलेज के कुछ छात्र-छात्राओं ने अपनी पहचान सार्वजनिक होने के डर से यह वीडियो उन्हें भेजा है। इसके बाद मामला सामने आया और वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित होने लगा। पांडे का आरोप है कि वीडियो के जरिए कॉलेज की अव्यवस्थाओं को उजागर करने वाले विद्यार्थियों पर प्रबंधन की ओर से उसे हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह स्थिति और भी चिंताजनक है। किसी संस्थान में अव्यवस्था की शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को डराने के बजाय उनकी शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए। सवाल उठता है कि प्रबंधन को विद्यार्थियों की सुरक्षा से ज्यादा अपनी छवि बचाने की चिंता क्यों है?

पूरे परिसर की जांच कराए प्रशासन-
एमपीएसयू अध्यक्ष अभिषेक पांडे ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज परिसर का तत्काल और निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए। केवल वाटर कूलर की जांच तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि पेयजल टंकियों, वाटर कूलरों, शौचालयों, साफ-सफाई, प्रयोगशालाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी जांच हो। पानी के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका कहना है कि कॉलेज में सामने आ रही शिकायतें बताती हैं कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर प्रबंधन की जवाबदेही तय होना जरूरी है। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि शिकायत करने वाले किसी विद्यार्थी को प्रताड़ित न किया जाए।

58 लाख के फीस घोटाले पर भी घिरा प्रबंधन-
श्रीराम कॉलेज का विवाद केवल वाटर कूलर तक सीमित नहीं है। एमपीएसयू के अध्यक्ष अभिषेक पांडे ने कॉलेज से जुड़े 58 लाख रुपये के कथित फीस गबन और इस मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर भी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच और कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। कथित गबन की जिम्मेदारी तय करने के बजाय कर्मचारियों को आगे कर संचालकों की भूमिका पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाया जा रहा है।
पांडे ने सवाल उठाया कि विद्यार्थियों से वसूली गई फीस की रकम आखिर कहां गई? किसके निर्देश पर उसका उपयोग हुआ? यदि कर्मचारियों के स्तर पर गड़बड़ी हुई तो उसके पीछे की पूरी वित्तीय प्रक्रिया और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? उनका आरोप है कि दर्जनों विद्यार्थियों के साथ हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविकता सामने आने से रोकने की कोशिश की जा रही है।

सवालों के घेरे में कॉलेज की जवाबदेही-
कॉलेज से जुड़े पूर्व विवादों में छात्राओं की सुरक्षा, दर्ज आपराधिक प्रकरणों और कर्मचारियों द्वारा लगाए गए कथित शोषण के आरोपों की जांच जैसे विषय भी शामिल रहे हैं। ऐसे में वाटर कूलर का वायरल वीडियो संस्थान की कार्यप्रणाली पर एक और गंभीर सवाल बनकर सामने आया है। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह वीडियो की सत्यता की जांच करे, पेयजल की गुणवत्ता की पुष्टि कराए और 58 लाख रुपये के कथित फीस गबन सहित पहले से लंबित शिकायतों की निष्पक्ष पड़ताल सुनिश्चित करे। आखिर शिक्षा के नाम पर संचालित संस्थान में विद्यार्थियों को सुरक्षित पानी, सुरक्षित वातावरण और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। कॉलेज की प्रतिष्ठा बचाने से पहले विद्यार्थियों की जिंदगी और उनके भविष्य की सुरक्षा जरूरी है।