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ऊँचे दामों पर चलती रही मेडीनोवा से खरीददारी,चिकित्सा महाविद्यालय में 1.25 करोड़ का घोटाला उजागर, तत्कालीन अधीक्षक समेत तीन पर ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर

 

जबलपुर। शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सा महाविद्यालय में 1.25 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर ने तत्कालीन अधीक्षक सहित तीन जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि दवा खरीद में नियमों की अनदेखी कर मेसर्स मेडीनोवा फार्मास्यूटिकल्स को लाभ पहुंचाया गया और शासन को करोड़ों का आर्थिक नुकसान हुआ।

यह हैं मामला-
ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार, शिकायत में बताया गया था कि वर्ष 2011-12 में चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा दवा और सर्जिकल सामग्री क्रय हेतु निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी। पहले पांच निविदाकारों (एल-01 से एल-05) द्वारा सामग्री आपूर्ति से इंकार करने पर उनके सिक्योरिटी डिपॉजिट राजसात कर एल-06 निविदाकार मेडीनोवा से अनुबंध किया गया। 18 अक्टूबर 2011 को यह अनुबंध निष्पादित हुआ, लेकिन इसमें समाप्ति तिथि का उल्लेख नहीं किया गया। बाद में तत्कालीन अधीक्षक और फार्मासिस्ट पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2013 तक नए टेंडर जारी किए बिना लगातार मेडीनोवा से ऊंचे दामों पर दवाएं व सामग्री खरीदीं।

अतिरिक्त भुगतान और भ्रष्टाचार की पुष्टि-
जांच में पाया गया कि फार्मासिस्ट आर.पी. दुबे ने जनवरी 2012 में क्रय शाखा का प्रभार संभालने के बाद भी निविदा नीति की अनदेखी की। इसी दौरान तत्कालीन संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक सविता वर्मा ने भी अनुबंध की खामियों को नजरअंदाज किया और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने की नियत से कार्यवाही की। इस पूरी प्रक्रिया में शासन को करीब 1.25 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।

तत्कालीन अधीक्षक, फार्मासिस्ट पर कार्रवाई-
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने प्राथमिक जांच के बाद तत्कालीन अधीक्षक, फार्मासिस्ट आरपी दुबे और अन्य जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।

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