पेट्रोल अटैक के 16 दिन बाद भी आरोपी फरार, मदन महल थाना पुलिस की सुस्त जांच के नाम पर सिर्फ दावे; सुरक्षा मांगता रहा परिवार, सोती रही पुलिस, पेट्रोल अटैक ने खोली सिस्टम की पोल
16 दिन बाद भी पेट्रोल अटैक का आरोपी फरार, मदन महल थाना पुलिस पर उठे सवाल; पहले पथराव पर चुप रही पुलिस, अब कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल

जबलपुर के मदन महल थाना क्षेत्र में हुए दिल दहला देने वाले पेट्रोल अटैक मामले ने शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 4 मई 2026 की रात कॉलेज छात्र शिवांश बैन पर हुए जानलेवा हमले को 16 दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस पूरे मामले में मदन महल थाना पुलिस की धीमी कार्रवाई और लापरवाही अब खुलकर सामने आती नजर आ रही है।
घटना रविवार तड़के करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है। 22 वर्षीय शिवांश बैन अपने घर में गहरी नींद में सो रहा था, तभी अज्ञात हमलावर ने फ्लाईओवर ब्रिज से पेट्रोल फेंककर आग लगा दी। पेट्रोल घर की छत को पार करते हुए सीधे युवक के ऊपर गिरा और कुछ ही सेकंड में कमरे में आग भड़क उठी।
अचानक लगी आग और तेज जलन से युवक चीख उठा आवाज सुनकर परिवार के लोग दौड़े और बड़े भाई ने तत्काल कंबल डालकर आग बुझाई। इसके बाद गंभीर हालत में शिवांश को निजी अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक शिवांश करीब 50 प्रतिशत तक झुलस चुका है। उसके दोनों हाथ, सीना और कमर का हिस्सा गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और परिवार सदमे में है।
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है, क्योंकि पीड़ित परिवार ने घटना से 10 दिन पहले ही घर पर हुए पथराव की शिकायत मदन महल थाने में दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और न ही सुरक्षा बढ़ाई गई। अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद आज शिवांश अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ाई नहीं लड़ रहा होता।
घायल छात्र की मां मनोरमा ने बताया कि परिवार की किसी से कोई पुरानी दुश्मनी नहीं है। इसके बावजूद पहले पथराव और फिर पेट्रोल अटैक जैसी घटनाएं होना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि पुलिस ने शुरुआती शिकायत को हल्के में लेकर बड़ी चूक की है।
घटना के बाद पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाने, फ्लाईओवर से सबूत इकट्ठा करने और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की बात कही थी। थाना प्रभारी ने जल्द आरोपियों को पकड़ने का दावा भी किया था, लेकिन 16 दिन बाद भी नतीजा शून्य है। आरोपी अब भी फरार है और पुलिस सिर्फ जांच जारी होने की बात दोहरा रही है
स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब शिकायत के बाद भी पुलिस अलर्ट नहीं हुई और इतनी बड़ी वारदात के बाद भी आरोपी पकड़ में नहीं आ रहा, तो आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करें?
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पुलिस सिस्टम की नाकामी का आईना बन चुकी है। अब सवाल यही है कि आखिर मदन महल थाना पुलिस कब जागेगी और कब इस गंभीर मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की सुस्त जांच और कमजोर कार्रवाई को उजागर कर रहा है।



