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रईसजादों की गुंडागर्दी: कार पर बैठकर लहराए हथियार, कानून को खुली चुनौती,राजनीतिक संरक्षण या पैसों का घमंड? सड़कों पर खुलेआम स्टंटबाजी, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

जबलपुर में रैली के नाम पर स्टंटबाजी: हथियार लहराते रईसजादे, क्या राजनीतिक संरक्षण से बढ़ रही अराजकता?

संस्कारधानी जबलपुर में एक बार फिर कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह कुछ युवक महंगी गाड़ियों के काफिले के साथ शहर की सड़कों पर स्टंटबाजी करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह काफिला एक विधायक की दवाई और जन्मदिन के मौके पर निकाली गई रैली का हिस्सा था।

वीडियो में युवक चलती गाड़ियों के सनरूफ पर बैठकर न सिर्फ खतरनाक स्टंट कर रहे हैं, बल्कि हाथों में हथियार लहराते भी दिखाई दे रहे हैं। कई वाहनों में रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं है, जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी को दर्शाता है। इस तरह की हरकतें न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि आम लोगों की जान के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।

जश्न या कानून को चुनौती?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी जनप्रतिनिधि के कार्यक्रम के नाम पर इस तरह की रैली निकालना सही है? क्या जश्न मनाने का यही तरीका है, जिसमें सड़कों पर दहशत फैलाई जाए और नियमों को ताक पर रख दिया जाए?

राजनीतिक संरक्षण पर उठते सवाल
इस घटना के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या इन रईसजादों को किसी तरह का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? क्या इसी वजह से ये बेखौफ होकर सड़कों को अपनी जागीर समझ बैठे हैं?

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की बात जरूर कही है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा था, तब पुलिस कहां थी? क्या गश्त के दौरान किसी को यह नजर नहीं आया? हर बार की तरह क्या इस बार भी कार्रवाई सिर्फ वायरल वीडियो तक सीमित रहेगी?

अब जरूरत है सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की, ताकि यह संदेश स्पष्ट जाए कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी को भी सड़कों पर अराजकता फैलाने की छूट नहीं दी जाएगी।

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