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(मध्यप्रदेश) पहली बारिश में बिजली व्यवस्था हुई बेपटरी, घंटों अंधेरे में डूबे शहर और गांव

मानसून की पहली दस्तक ने खोली बिजली विभाग की तैयारियों की पोल, उपभोक्ताओं में बढ़ा आक्रोश

सेटन्यूज़, डेस्क। पहली बारिश के साथ ही बिजली व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है। लंबे समय से बिजली कटौती और जर्जर लाइनों की समस्या से जूझ रहे उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि इस बार विभाग ने पर्याप्त तैयारियां की होंगी, लेकिन मौसम की पहली तेज बारिश और हवाओं ने बिजली विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी। कई इलाकों में घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बारिश शुरू होते ही अनेक स्थानों पर बिजली के तारों पर पेड़ों की शाखाएं गिरने, ट्रांसफार्मरों में तकनीकी खराबी आने और फीडरों में फॉल्ट होने की घटनाएं सामने आईं। शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को कई घंटों तक अंधेरे में रहना पड़ा। कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई क्योंकि मोटर पंप बिजली के अभाव में संचालित नहीं हो सके।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश से पहले बिजली लाइनों की मरम्मत, पेड़ों की छंटाई और उपकरणों के रखरखाव के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में व्यवस्था चरमरा जाती है। लोगों ने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से समय रहते आवश्यक कार्य नहीं किए गए, जिसके कारण मामूली बारिश भी बड़ी समस्या बन गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश के कई हिस्सों में विद्युत वितरण नेटवर्क अभी भी पुराने ढांचे पर निर्भर है। बढ़ती आबादी और बिजली की बढ़ती मांग के अनुपात में आधारभूत संरचना का आधुनिकीकरण पर्याप्त गति से नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप मौसम में थोड़ा भी बदलाव होने पर बिजली व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेज हवाओं और बारिश के कारण कई स्थानों पर तकनीकी बाधाएं उत्पन्न हुईं, जिन्हें दूर करने के लिए मरम्मत दलों को तत्काल रवाना किया गया। विभाग ने दावा किया कि अधिकांश क्षेत्रों में कुछ घंटों के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई, जबकि शेष प्रभावित क्षेत्रों में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि समस्या केवल पहली बारिश तक सीमित नहीं है। गर्मी के मौसम में भी बार-बार बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में लोगों ने मांग की है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं ताकि हर वर्ष बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से राहत मिल सके।

मानसून की शुरुआत के साथ बिजली व्यवस्था पर उठे सवालों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल दावों और योजनाओं से काम नहीं चलेगा। यदि विद्युत वितरण तंत्र को मजबूत नहीं किया गया तो आगामी दिनों में भारी वर्षा और आंधी-तूफान के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल पहली बारिश ने बिजली विभाग की तैयारियों की वास्तविक परीक्षा ले ली है और इस परीक्षा में व्यवस्था कई स्थानों पर कमजोर साबित होती दिखाई दे रही है।

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