कंट्रोल रूम प्रभारी सतीश झरिया बने टीआई -सनसनीखेज हत्याकांडों की गुत्थियां सुलझाने वाले अधिकारी के कंधों पर पुलिस कप्तान ने लगाए तीन सितारे
कंट्रोल रूम प्रभारी सतीश झरिया बने टीआई -सनसनीखेज हत्याकांडों की गुत्थियां सुलझाने वाले अधिकारी के कंधों पर पुलिस कप्तान ने लगाए तीन सितारे

SET NEWS, जबलपुर। जिले में अपनी सटीक विवेचना और अपराधों के वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए अलग पहचान बना चुके कंट्रोल रूम प्रभारी सतीश झरिया को निरीक्षक (टीआई) पद पर पदोन्नत किया गया है। पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद वरिष्ठ पुलिस कप्तान संपत उपाध्याय एवं एएसपी (क्राइम) जितेंद्र सिंह ने उनके कंधों पर निरीक्षक के तीन सितारे सजाकर नई जिम्मेदारी सौंपी। इसी क्रम में उपनिरीक्षक राहुल बघेल और चंद्रकांत झा भी निरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए।
दक्ष विवेचक के रूप में बनाई अलग पहचान-
वर्तमान में कंट्रोल रूम प्रभारी के रूप में पदस्थ सतीश झरिया को जबलपुर पुलिस के चुनिंदा दक्ष विवेचकों में माना जाता है। ओमती, धनवंतरी नगर और रांझी सहित विभिन्न थानों में सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई अंधी और जघन्य हत्याओं की गुत्थियां सुलझाकर न केवल अपराधियों को सलाखों तक पहुंचाया, बल्कि मजबूत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से उन्हें कठोर सजा भी दिलवाई।
धनवंतरी नगर और रांझी के हत्याकांड बने मिसाल-
झरिया के करियर का सबसे चर्चित मामला धनवंतरी नगर का रहा, जहां गोटेगांव के एक युवक की हत्या कर शव के टुकड़े कर अलग-अलग पॉलीथिन में भरकर नाले में फेंक दिए गए थे। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और सूक्ष्म विवेचना के आधार पर पुलिस हत्यारों तक पहुंची। वहीं रांझी क्षेत्र में जली हुई लाश की पहचान डीएनए परीक्षण से कर हत्या का खुलासा किया गया, जिसमें तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई।
हाई-प्रोफाइल मामलों में भी दर्ज कराई सफलता-
सतीश झरिया ने ओमती थाना क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को जेडीए अध्यक्ष बताने वाले आरोपी को न्यायालय से पांच वर्ष की सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बहुचर्चित वेदिका ठाकुर हत्याकांड में साक्ष्य छिपाने के मामले में दोषी पाए गए स्वयंभू डॉक्टर अमित खरे को दो वर्ष के कारावास की सजा दिलाने वाली विवेचना भी उनके नेतृत्व में हुई। इसके अलावा पाटन के टिमरी सामूहिक हत्याकांड के फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।



