जबलपुर का नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल अस्पताल में पानी का संकट: दो दिनों से बूंद-बूंद को तरसे मरीज, जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?
मेडिकल अस्पताल में पानी का संकट: दो दिनों से बूंद-बूंद को तरसे मरीज, जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?

जबलपुर के सबसे बड़े नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में इन दिनों अव्यवस्थाओं ने मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालत यह है कि बीते दो दिनों से अस्पताल में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से वार्डों में भर्ती मरीज और उनके परिजन बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर पानी जैसी बुनियादी सुविधा का ठप होना प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में लगे वाटर कूलर बंद पड़े हैं, कई जगहों पर नलों में पानी नहीं आ रहा और जहां पानी उपलब्ध है वहां लंबी कतारें लग रही हैं। दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे लोग अपने मरीजों को छोड़ पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। कई परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को बार-बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
बताया जा रहा है कि अस्पताल की जल आपूर्ति व्यवस्था पिछले दो दिनों से बाधित है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं कराई। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में पहले ही भारी भीड़ रहती है, ऐसे में पानी जैसी मूलभूत सुविधा का बंद होना बेहद चिंताजनक है। खासकर बुजुर्ग मरीज, महिलाएं और छोटे बच्चों के परिजन सबसे ज्यादा परेशान दिखाई दे रहे हैं।
अस्पताल पहुंचे कई लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब मेडिकल कॉलेज अस्पताल को प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में गिना जाता है, तो यहां इस तरह की अव्यवस्था आखिर क्यों? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने हालात की गंभीरता को समझने की कोशिश नहीं की? लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और रखरखाव पर ध्यान दिया जाता तो मरीजों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
क्या मेडिकल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा और डीन डॉ. नवनीत सक्सेना इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल मरीज और उनके परिजन अस्पताल प्रबंधन से तत्काल पानी की व्यवस्था बहाल करने और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और निगरानी तंत्र की पोल खोलती नजर आ रही है।



