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जबलपुर की मदन महल पुलिस की ‘नींद’ ने झुलसाया शिवांश का भविष्य: पत्थरबाजी की शिकायत पर कार्रवाई होती, तो न बरसता तेजाब

मदन महल पुलिस की 'नींद' ने झुलसाया शिवांश का भविष्य: पत्थरबाजी की शिकायत पर कार्रवाई होती, तो न बरसता तेजाब

जबलपुर मदन महल थाना पुलिस की कानून व्यवस्था अब भगवान भरोसे है! मदन महल थाना क्षेत्र में एक युवक पर फ्लाईओवर से एसिड फेंकने की सनसनीखेज वारदात ने पुलिस की कार्यप्रणाली की धज्जियां उड़ा दी हैं। पीड़ित परिवार चीख-चीख कर कह रहा है कि उन्होंने पहले ही हमले की आशंका जताई थी, लेकिन पुलिस ने हाथ पर हाथ धरे अपराधी के अगले कदम का इंतज़ार किया। आज शिवांश अस्पताल में ज़िंदगी की जंग लड़ रहा है और खाकी महज़ ‘जांच’ का दिलासा दे रही है।

खौफनाक वारदात
रात के अंधेरे में फफली फ्लाईओवर मौत का रास्ता बन गया। फ्लाईओवर के नीचे बने मकान में रहने वाला शिवांश जब अपने घर में सुरक्षित महसूस कर रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने ऊपर से एसिड की बौछार कर दी। तेजाब की बूंदें पड़ते ही शिवांश का शरीर झुलसने लगा और उसकी चीखों से पूरा इलाका दहल गया। उसे तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत नाज़ुक बनी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए कि वे फ्लाईओवर जैसी जगह से बेखौफ होकर हमला कर रहे हैं?
(मदन महल पुलिस की गंभीर लापरवाही)
इस हमले की पटकथा कई दिन पहले ही लिख दी गई थी। पीड़ित की माँ ने पुलिस को आगाह किया था कि कुछ लोग लगातार उनके घर पर पत्थरबाजी कर रहे हैं। मदन महल थाने में शिकायत भी की गई, लेकिन पुलिस ने इसे महज़ मामूली घटना मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया। अगर उस वक़्त पत्थर फेंकने वालों को सलाखों के पीछे डाला जाता, तो आज शिवांश पर एसिड फेंकने की हिम्मत कोई नहीं कर पाता। यह पुलिस की वह लापरवाही है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को मातम में डुबो दिया है।
(सुरक्षा के दावों पर सवालिया निशान)
एक तरफ शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस गश्त का दावा किया जाता है, तो दूसरी तरफ अपराधी मदन महल थाने की नाक के नीचे वारदात को अंजाम देकर गायब हो जाते हैं। परिजनों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। उनका साफ़ कहना है कि आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ़्तारी हो और उन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की जाए जिन्होंने शिकायत मिलने के बावजूद ढुलमुल रवैया अपनाया,
मदन महल पुलिस के लिए यह मामला महज़ एक एफआईआर (FIR) हो सकता है, लेकिन शिवांश के परिवार के लिए यह उनके भविष्य पर हुआ हमला है। मदन महल पुलिस की यह खामोशी अपराधियों के लिए एक मौन निमंत्रण की तरह है। क्या अब भी पुलिस किसी और बड़ी वारदात का इंतज़ार करेगी? या फिर पीड़ित को इंसाफ़ मिलेगा?

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