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जबलपुर: खाकी भी नहीं सुरक्षित: पुलिसकर्मी पर बीच सड़क हमला, बेखौफ बदमाशों ने दी कानून को चुनौती”

खाकी भी नहीं सुरक्षित: पुलिसकर्मी पर बीच सड़क हमला, बेखौफ बदमाशों ने दी कानून को चुनौती”

जबलपुर में हाल के दिनों में जिस तरह अपराध की घटनाएं सामने आ रही हैं, उसने आम जनता के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। खुलेआम मारपीट, रास्ता रोकना, लूट और धमकी जैसी घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि अपराधी अब कानून से बेखौफ नजर आ रहे हैं और वारदात को अंजाम देने के बाद आसानी से फरार हो जाते हैं। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की जरूरत है।

हाल ही में साईं मंदिर हाउबाग रोड क्षेत्र में पुलिसकर्मी पर हमला इसका बड़ा उदाहरण है। जब ड्यूटी पर जा रहे पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजमी है। अपराधियों ने जिस तरह से रास्ता रोककर हमला किया, वह कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती है। ऐसे मामलों में यदि तुरंत और कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तो अपराधियों के हौसले और बढ़ सकते हैं।

घटना साईं मंदिर हाउबाग रोड क्षेत्र की है। आईजी ऑफिस की महिला सुरक्षा शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक सविनय लोधी बीती रात करीब 9 बजे अपने घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। जैसे ही वे साईं मंदिर के सामने पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने उनका रास्ता रोक लिया।

मुख्य आरोपी बंटी अपने दो साथियों के साथ मौके पर मौजूद था। बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी पहले से ही योजना बनाकर बैठे थे। जैसे ही सविनय लोधी ने रास्ता रोकने का विरोध किया, आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए उन पर हमला कर दिया। इस हमले में पुलिसकर्मी को गंभीर चोटें आईं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में अपराधियों का डर बढ़ता जा रहा है। रात के समय ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े भी वारदातें हो रही हैं। यह स्थिति पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। लोगों का मानना है कि सिर्फ शिकायत दर्ज करना काफी नहीं है, बल्कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त सजा जरूरी है, ताकि अपराधियों में कानून का भय फिर से स्थापित हो सके।

अपराध को रोकने के लिए सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी भूमिका अहम है। संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देना, अपराधियों का विरोध करना और जागरूक रहना जरूरी है। इसके साथ ही पुलिस को भी गश्त बढ़ाने, संवेदनशील इलाकों में निगरानी रखने और अपराधियों की सूची बनाकर उन पर नजर रखने की जरूरत है।

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