जबलपुर: पाटन में लाखों की चोरी, पुलिस गश्त पर सवाल—क्या सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है थाना?”
पाटन में लाखों की चोरी, पुलिस गश्त पर सवाल—क्या सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है थाना?”

संस्कारधानी जबलपुर के पाटन क्षेत्र में हुई लाखों की चोरी ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूने मकान को निशाना बनाकर चोरों ने जिस तरह से बड़ी वारदात को अंजाम दिया, उससे साफ जाहिर होता है कि इलाके में पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था पूरी तरह कमजोर पड़ चुकी है।
घटना चौपाटी वार्ड की बताई जा रही है, जहां निवासी विवेक बबेले अपने पूरे परिवार के साथ एक शादी समारोह में शामिल होने गए हुए थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने उनके घर का मुख्य दरवाजा तोड़ दिया और अंदर घुसकर अलमारी के ताले तोड़ते हुए करीब 12 लाख रुपए के सोने-चांदी के जेवर और 1 लाख 80 हजार रुपए नगद पार कर दिए। जब परिवार वापस लौटा तो घर की हालत देखकर उनके होश उड़ गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी चोरी की घटना के दौरान आखिर पाटन थाना पुलिस कहां थी? क्या इलाके में रात के समय गश्त नहीं होती? या फिर गश्त सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गई है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पहले भी चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पुलिस सतर्क रहती, नियमित गश्त होती और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाती, तो शायद इस तरह की वारदात को रोका जा सकता था। लेकिन यहां तो हालात ऐसे हैं कि चोर बेखौफ होकर घंटों वारदात को अंजाम देते हैं और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती।
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पाटन थाना में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू करने की बात कही है। लेकिन अब सवाल सिर्फ जांच का नहीं है, बल्कि भरोसे का है—क्या आम जनता पाटन पुलिस पर भरोसा कर सकती है?
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पाटन पुलिस तंत्र सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित हो गया है? क्या अपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है?
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