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जबलपुर: डॉक्टर नहीं, धोखेबाज डायरेक्टर स्वयं-भू भाजपा नेता अमित खरे! दूसरे की डिग्री पर रजिस्ट्रेशन, फर्जी आईडी से सोशल मीडिया में महिमा मंडन, भाजपा ने भगाया तो सपा से मांगी गुहार

जबलपुर। स्मार्ट सिटी अस्पताल और इसके फर्जी और खुद को स्वयं-भू भाजपा नेता प्रचारित करने वाला अमित खरे पर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब यह भी उजागर हुआ है कि जिस अस्पताल को खरे अपने नाम से चलाने का दावा करता है, उसका रजिस्ट्रेशन दरअसल डॉ. सुभाष कुमार की डिग्री के आधार पर हुआ था। डॉ. सुभाष वहां केवल बतौर ड्यूटी डॉक्टर आते हैं, जबकि खरे को केवल केयर टेकर बनाया गया था। इसके बावजूद अमित खरे खुद को न केवल डॉक्टर बताता है बल्कि अस्पताल का डायरेक्टर भी प्रचारित करता है।

सोशल मीडिया पर फर्जी साम्राज्य-
खरे की असलियत केवल अस्पताल तक ही सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम में दर्जनों फर्जी आईडी बनाकर अपना झूठा महिमामंडन रच डाला। अपनी ही पोस्ट पर कमेंट और समर्थन दिखाकर वह खुद को चर्चित और प्रभावशाली व्यक्तित्व साबित करने की कोशिश करता रहा।

राजनीति में पैर जमाने की नाकाम कोशिश-
फर्जीवाड़े का यह खेल राजनीति तक भी पहुंचा। विधानसभा चुनाव के दौरान खरे ने खुद को भाजपा समर्थक बताते हुए पन्ना जिले की पवई सीट से टिकट की दावेदारी पेश कर दी थी। हालांकि पार्टी ने उसकी दावेदारी को सिरे से खारिज कर दिया। टिकट न मिलने पर खरे ने अचानक रंग बदलते हुए समाजवादी पार्टी का रुख किया। खजुराहो दौरे पर पहुंचे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर उन्होंने टिकट की मांग की। लेकिन अखिलेश ने न तो सदस्यता दी और न ही टिकट।

प्रशासन और राजनीति पर गहरे सवाल-
अब बड़ा सवाल यह है कि जिस शख्स का अस्पताल रजिस्ट्रेशन ही दूसरे की डिग्री पर आधारित है, जो खुद को फर्जी तरीके से डॉक्टर-डायरेक्टर बताता है, दर्जनों फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से प्रचार करता है और राजनीति में जगह बनाने की कोशिश करता है उस पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या खरे का यह फर्जी साम्राज्य प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत से फल-फूल रहा है या फिर यह पूरा खेल राजनीतिक संरक्षण के सहारे चल रहा है?

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