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SETNEWS Special # मणिपुरी भाषा दिवस: भाषा की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव

20 अगस्त 1992 में मिली संवैधानिक मान्यता, आज बन गई गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक

सेटन्यूज़, सत्यजीत यादव। आज पूरा मणिपुर और देश के भाषा प्रेमी समुदाय “मणिपुरी भाषा दिवस” मना रहे हैं। 20 अगस्त 1992 को मणिपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, जिससे इसे राष्ट्रीय मान्यता और आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त हुआ। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को स्मरण करते हुए, हर साल यह दिन भाषाई गौरव और सांस्कृतिक पहचान के रूप में मनाया जाता है।

मणिपुरी, जिसे स्थानीय रूप से “मेइतेइ लोन” कहा जाता है, सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि मणिपुरी समाज की सांस्कृतिक आत्मा है। इसकी लिपि मेइतेइ मयेक हो या इसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा — यह भाषा सदियों से लोकगीतों, शास्त्रीय नृत्य, पौराणिक कथाओं और जनजीवन का अभिन्न हिस्सा रही है।

1992 में संविधानिक दर्जा मिलने के बाद मणिपुरी भाषा को शैक्षिक पाठ्यक्रम, प्रशासनिक कार्यों और साहित्यिक मंचों पर विशेष स्थान मिला। इससे मणिपुरी भाषी लोगों की भाषाई अस्मिता को मजबूती, और आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा से जुड़ाव का अवसर मिला।

इस अवसर पर मणिपुर समेत देशभर में संगोष्ठियां, कविता पाठ, नाटक, भाषण प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भाषाविदों और शिक्षाविदों का मानना है कि मणिपुरी जैसी भाषाएं भारत की भाषाई विविधता की धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मणिपुरी भाषा दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक संदेश है, कि हर भाषा में एक संस्कृति सांस लेती है, और उसकी पहचान को मान्यता देना विविधता में एकता की असली जीत है।

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