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जबलपुर में ट्रैक्टर से बदली तकदीर: दिघौरा की आशा देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

जबलपुर में ट्रैक्टर से बदली तकदीर: दिघौरा की आशा देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

जबलपुर जिले के भेड़ाघाट के ग्राम दिघौरा की आशा देवी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बन चुकी हैं। उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी एक नई राह दिखाई है।
भगवती देवी का जीवन पहले बेहद कठिन दौर से गुजर रहा था। उनके पति उनके साथ नहीं रहते और वह किसी तरह मायके में रहकर अपना गुजर-बसर करती थीं। सीमित आय के कारण बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता था।
 कई बार हालात ऐसे बनते कि परिवार को उधार लेकर काम चलना पड़ता था। आशा देवी के जीवन बदलाव तब आया जब उनकी आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता के रूप में नियुक्ति हुई। इसके बाद वह और उनकी माता को एक स्व-सहायता समूह से जुड़ी। उन्‍होंने और उनकी माता ने समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत करना सीखा, वित्तीय प्रबंधन की समझ विकसित की और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। छोटे-छोटे ऋण लेकर उन्होंने गाय एवं भैंस पालन और खेती जैसे कार्यों का बेहतर ढ़ंग से संचालन शुरू किए, जिससे उनकी आय में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगी।
उन्‍हें स्‍व-सहायता समूह 01 लाख रुपए का ऋण प्राप्‍त हुआ । इन संसाधनों का उपयोग करते हुए आशा देवी ने ट्रेक्‍टर खरीदने का निर्णय लिया और ट्रेक्टर खरीदा। इसके बाद उन्होंने गांव में जुताई, बुवाई जैसे कृषि कार्यों के लिए ट्रेक्टर से सेवाएं देना शुरू किया। यह कदम उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अब उन्हें नियमित और सम्मानजनक आय मिलने लगी।
ट्रैक्टर गतिविधि शुरू होने के बाद उनकी मासिक आय में इजाफा हुआ साथ ही खेती और पशु-पालन से भी अतिरिक्त आय होने लगी। पहले जहां परिवार की कुल आय लगभग 10 हजार रुपए प्रतिमाह थी, वहीं अब यह बढ़कर 25 हजार रुपए से अधिक हो गई है। आर्थिक सशक्तिकरण के साथ आशा देवी का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और परिवार का पालन-पोषण सम्मानपूर्वक कर रही हैं। गांव में उनकी पहचान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ सफल महिला उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी है।
आशा देवी की सफलता से प्रेरित होकर अब गांव की कई महिलाएं स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका संघर्ष और सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से बदलाव संभव है। आशा देवी की कहानी यह बताती है कि यदि सही अवसर, मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प मिल जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है।

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