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जबलपुर में रांझी मर्डर मिस्ट्री सुलझी: SP और TI की लीडरशिप में पुलिस की बड़ी कामयाबी, दो शूटर गिरफ्तार”

रांझी मर्डर मिस्ट्री सुलझी: SP और TI की लीडरशिप में पुलिस की बड़ी कामयाबी, दो शूटर गिरफ्तार”

जबलपुर के थाना रांझी क्षेत्र में हुई सनसनीखेज अंधी हत्या के मामले में पुलिस ने तेज़ कार्रवाई करते हुए बड़ा खुलासा किया है। इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय और थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी की मजबूत लीडरशिप और रणनीति साफ तौर पर देखने को मिली, जिनकी अगुवाई में टीम ने चंद दिनों में ही आरोपियों तक पहुंच बनाई।

23 अप्रैल 2026 की सुबह बड़ा पत्थर नरसिंह नगर इलाके में क्लीरेंस एटकिंस अपने 5 वर्षीय बेटे को स्कूल छोड़कर लौट रहे थे। सुबह करीब 8:30 बजे जैसे ही वह अशोक मेडिकल के पास पहुंचे, तभी बाइक सवार बदमाशों ने उनके सिर पर गोली मार दी और मौके से फरार हो गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही SP सम्पत उपाध्याय ने तत्काल एक्शन लेते हुए विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आयुष गुप्ता और नगर पुलिस अधीक्षक सतीष साहू के मार्गदर्शन में TI उमेश गोल्हानी ने मोर्चा संभाला और पूरी टीम के साथ लगातार निगरानी करते हुए जांच को आगे बढ़ाया।

पुलिस ने इस केस को चुनौती के रूप में लेते हुए सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और मुखबिरों की मदद से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ीं। जांच में सामने आया कि रायपुर के पास स्थित करीब 15 एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने हत्या का रूप ले लिया।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि बाबा नेलसन के कहने पर उसके बेटे प्रिंस नेलसन ने अपने साथियों मोहित ठाकुर, अर्पित कुशवाहा और तेजबल उर्फ अरुण रैकवार के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। घटना वाले दिन आरोपियों ने पहले रैकी की और फिर सही मौके पर क्लीरेंस एटकिंस को गोली मार दी।

पुलिस टीम ने तेजी दिखाते हुए दबिश देकर दो मुख्य आरोपियों—मोहित ठाकुर और तेजबल उर्फ अरुण रैकवार—को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से बिना नंबर की दो मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी के नेतृत्व में उप निरीक्षक मयंक यादव, प्रधान आरक्षक सुनील दुबे, पुरुषोत्तम, चन्द्रभान और आरक्षक मनीष अहिरवार, मनीष, अभिषेक, संदीप मेहरा की अहम भूमिका रही।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि SP सम्पत उपाध्याय की सख्त मॉनिटरिंग और TI उमेश गोल्हानी की जमीनी पकड़ के सामने अपराधियों की एक नहीं चलती। जबलपुर पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ एक बड़ी सफलता है, बल्कि शहर में कानून व्यवस्था के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत करती है।

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