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जबलपुर मेडिकल अस्पताल बना ‘सरकारी कबाड़खाना’: ऐशो-आराम में डूबे अफसरों के गाल पर जनता का तमाचा

मेडिकल अस्पताल बना 'सरकारी कबाड़खाना': ऐशो-आराम में डूबे अफसरों के गाल पर जनता का तमाचा

कागजी दावों की उतरी धज्जी
जबलपुर का नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल आज महाकौशल की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे बड़ा कलंक बन चुका है। सरकार की तरफ से मिलने वाली विश्वस्तरीय सुविधाओं के दावों की धज्जियां रोज यहाँ उड़ती हैं। अस्पताल की चौखट पर आते ही गरीब मरीज का दम टूटने लगता है।
साहबों का शाही घमंड
मरीजों के खून-पसीने के टैक्स पर पलने वाले अस्पताल के बड़े साहबों का घमंड सातवें आसमान पर है। वातानुकूलित केबिनों की बंद खिड़कियों से इन्हें बाहर पसरा मौत का सन्नाटा दिखाई नहीं देता। रसूख की मखमली कुर्सियों पर चिपककर ये अफसर सिर्फ अपनी जेबें और तिजोरियां भरने में व्यस्त हैं।
जिंदा लाश बना प्रशासनिक तंत्र
लगातार आ रही बदहाली की खबरों के बाद भी अस्पताल का पूरा प्रशासनिक अमला एक जिंदा लाश की तरह बर्ताव कर रहा है। भ्रष्ट अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद इतनी गहरी है कि बेबस तीमारदारों की रोने-बिलखने की आवाजें भी इनके बहरे कानों तक नहीं पहुँच पा रही हैं।
स्ट्रेचर के नाम पर सिर्फ धोखा
अस्पताल के मुख्य द्वार से लेकर वार्डों तक, मरीजों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ढूंढने से भी नहीं मिलते। इस अत्यंत संवेदनशील आपातकालीन स्थिति में भी बुनियादी संसाधनों का यह घोर अभाव सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या के प्रयास के समान है।
जंग लगी मशीनों का साम्राज्य
पूरे परिसर में चारों तरफ सिर्फ टूटे-फूटे, बिना पहियों के और जंग खाए व्हीलचेयर का साम्राज्य फैला हुआ है। नए साधनों को खरीदने का करोड़ों का सरकारी बजट इन भ्रष्ट ठेकेदारों और अधिकारियों के आपसी काले गठजोड़ की भेंट चढ़ चुका है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
परिजनों की आंसुओं भरी बेबसी अस्पताल के गलियारों में रोज मानवता का चीरहरण होता है। जब कोई मजबूर बेटा अपनी बीमार माँ को अपनी पीठ पर लादकर सीढ़ियाँ चढ़ता है, तब इस निकम्मे सिस्टम की असली औकात सामने आती है। इन शर्मनाक नजारों को देखकर भी अधिकारियों का खून नहीं खौलता।
गरीबों की हाय से हिलेगा सिंहासन
अस्पताल को लूट का अड्डा बनाने वाले इन भ्रष्ट मगरमच्छों को शायद अंदाजा नहीं है कि गरीबों की यह हाय बहुत जल्द इनके आलीशान सिंहासनों को उखाड़ फेंकेगी। जनता के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है और पाई-पाई का हिसाब माँगा जाएगा।
आर-पार की अंतिम चेतावनी
यह ग्राउंड रिपोर्ट उन सोए हुए हुक्मरानों को अंतिम चेतावनी है जो कुर्सियों का रसूख दिखाकर बचते आए हैं। अगर 24 घंटे के अंदर अस्पताल की हर गैलरी में नए स्ट्रेचर नहीं चमके, तो जबलपुर की आक्रोशित जनता तुम्हारे दफ्तरों को कबाड़खाने में तब्दील कर देगी।

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