जिन्हें दुनिया ने छोड़ा, उन्हें मोक्ष ने अपनाया! विक्टोरिया के 7 निराश्रित मरीजों की जिम्मेदारी उठाएगी संस्था”
विक्टोरिया अस्पताल के लावारिस और निराश्रित मरीजों के लिए मोक्ष संस्था बनी सहारा, संचालक आशीष ठाकुर ने दी पूरी जानकारी

जबलपुर। शहर के शासकीय सेठ गोविंददास जिला चिकित्सालय (विक्टोरिया अस्पताल) में इलाज के लिए आने वाले ऐसे मरीज, जिनका कोई परिजन नहीं होता या जिनकी पहचान और परिवार का पता लगाना मुश्किल होता है, उनके लिए मोक्ष मानव सेवा एवं जन उत्थान समिति लंबे समय से सहारे का काम कर रही है। अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी पत्र में भी ऐसे लावारिस एवं निराश्रित मरीजों को उपचार के बाद सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई गई है।
मोक्ष संस्था के संचालक आशीष ठाकुर ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल में समय-समय पर मानसिक रूप से अस्वस्थ, वृद्ध अथवा ऐसे मरीज इलाज के लिए लाए जाते हैं, जिन्हें उनके परिवार द्वारा छोड़ दिया गया है। कई मरीजों के पास आधार कार्ड अथवा अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते। कई मामलों में उनके परिजनों का पता लगाना भी संभव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में इलाज पूरा होने के बाद मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने पर सुरक्षित स्थान और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन जाता है।
आशीष ठाकुर के मुताबिक मोक्ष संस्था पिछले लगभग तीन दशकों से लावारिस एवं निराश्रित मानव जीवन को सहारा देने, उनकी सेवा करने और मृत्यु होने की स्थिति में सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराने का कार्य कर रही है। संस्था की ओर से पहले भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा भेजे गए ऐसे बेसहारा मरीजों को आश्रय उपलब्ध कराया जाता रहा है।
अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि वर्तमान माह में विक्टोरिया अस्पताल में कुल 7 लावारिस एवं निराश्रित मरीज ऐसे हैं, जिन्हें आवश्यक चिकित्सकीय जानकारी और उपलब्ध अभिलेखों के साथ मोक्ष आश्रम में आश्रय प्रदान किए जाने की आवश्यकता है। अस्पताल प्रशासन ने संस्था से इन मरीजों को सुरक्षित आश्रय देने में सहयोग की अपेक्षा की है।
संस्था का कहना है कि ऐसे मरीजों के लिए केवल इलाज ही पर्याप्त नहीं है। उपचार के बाद उनकी सुरक्षा, भोजन, रहने की व्यवस्था, दवाइयां और नियमित देखभाल भी जरूरी होती है। खासतौर पर उन मरीजों के लिए समस्या और बढ़ जाती है, जिनकी पहचान नहीं हो पाती या जिनके परिवार का कोई सुराग नहीं मिलता।
आशीष ठाकुर ने बताया कि मोक्ष संस्था का उद्देश्य ऐसे बेसहारा लोगों को इंसानियत के साथ जीवन जीने का अवसर देना है। संस्था अस्पताल से मिलने वाली चिकित्सकीय जानकारी के आधार पर मरीजों की देखभाल करने का प्रयास करती है और आवश्यकता पड़ने पर उनके उपचार से संबंधित जानकारी भी सुरक्षित रखने में सहयोग करती है।
यह पहल केवल किसी संस्था या अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के मानवीय दायित्व से भी जुड़ी है। सड़क, सार्वजनिक स्थान या अस्पताल में बेसहारा हालत में मिलने वाले व्यक्ति को उपचार के बाद सुरक्षित आश्रय मिलना उसके जीवन और सम्मान दोनों के लिए जरूरी है।
ऐसे में विक्टोरिया अस्पताल प्रशासन और मोक्ष मानव सेवा एवं जन उत्थान समिति के बीच सहयोग की यह व्यवस्था उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनका इस दुनिया में अपना कहने वाला कोई नहीं है। आशीष ठाकुर ने भी लोगों से ऐसे निराश्रित और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है, ताकि किसी बेसहारा व्यक्ति को इलाज के बाद सड़क पर जीवन बिताने के लिए मजबूर न होना पड़े।



