Crime ReportsCrime ReportsIndiaJabalpurLatest NewsMP

हत्या के आरोपी को बचाने के बदले करोड़ों की जमीन का खेल? CSP नेहा पच्चीसिया पर FIR से खाकी के सिस्टम पर सवाल

हत्या के आरोपी को बचाने के बदले करोड़ों की जमीन का खेल? CSP नेहा पच्चीसिया पर FIR से खाकी के सिस्टम पर सवाल

कटनी। एक हत्या का मामला, समय पर चार्जशीट दाखिल न होने का आरोप, आरोपी को जमानत और उसके बाद करीब एक करोड़ रुपये की जमीन बेहद कम कीमत पर दूसरे के नाम कराने का कथित खेल—कटनी की CSP नेहा पच्चीसिया से जुड़ा मामला अब पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले में नेहा पच्चीसिया, मारूफ अहमद हनफी और क्षितिज राज बारापत्रे के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, पूरे मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आरोपी को बचाने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।

हत्या के आरोपी को राहत और फिर जमीन का कथित सौदा

मामला कुठला थाना क्षेत्र के कन्हवारा में युवक झब्बू कोल की हत्या से जुड़ा है। इस प्रकरण में रमेश लोधी को आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा में पुलिस द्वारा न्यायालय में चालान पेश नहीं किया गया, जिसके बाद आरोपी को जमानत का लाभ मिला।

इसके बाद कहानी में जमीन की एंट्री होती है। आरोप है कि रमेश लोधी की खसरा नंबर 2618/1 वाली जमीन, जिसकी सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब 82.86 लाख रुपये बताई गई, उसे कथित दबाव में महज 18.20 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी के नाम रजिस्टर्ड कराया गया। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि जमीन का वास्तविक सौदा करीब एक करोड़ सात लाख रुपये का होने का दावा किया गया, जबकि लगभग 92 लाख रुपये का भुगतान नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

नाम सामने आए तो जांच पहुंची जबलपुर

मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर रेंज के IG प्रमोद कुमार वर्मा ने जांच को कटनी से बाहर कर ASP अनु बेनीवाल को सौंपा। जांच में शिकायतकर्ता और संबंधित लोगों के बयान लिए गए तथा जमीन और बैंक लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर नेहा पच्चीसिया, मारूफ अहमद हनफी और क्षितिज राज बारापत्रे को मामले में आरोपी बनाया गया।

यहीं से सवाल उठता है—अगर शिकायत में इतने गंभीर आरोप थे, तो पुलिस विभाग की आंतरिक निगरानी व्यवस्था को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी?

पुलिस की वर्दी और जमीन का सौदा—कौन किसके साथ था?

आरोपों का सबसे गंभीर पहलू यही है कि एक तरफ हत्या के मामले की जांच चल रही थी और दूसरी तरफ उसी मामले के आरोपी से जुड़ी जमीन के कथित कम कीमत वाले सौदे की बात सामने आ रही है।

यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह केवल एक जमीन का विवाद नहीं होगा। यह पुलिस अधिकारों के कथित दुरुपयोग और आपराधिक मामले में आरोपी को लाभ पहुंचाने के आरोपों का गंभीर विषय बन जाएगा।

वहीं मारूफ अहमद हनफी और क्षितिज राज बारापत्रे की भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षितिज राज बारापत्रे से जुड़े बैंक लेनदेन में 15 लाख रुपये की राशि का उल्लेख जांच में सामने आया है। अब पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि जमीन के सौदे में रकम का वास्तविक प्रवाह क्या था और इसमें प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या रही।

30 हजार की कथित वसूली ने बढ़ाई तस्वीर की गंभीरता

यह मामला केवल जमीन तक सीमित नहीं है। CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ एक ट्रांसपोर्टर ने हाइवा वाहन छोड़ने के बदले कथित तौर पर 30 हजार रुपये लेने का आरोप भी लगाया था। इस शिकायत की जांच भी IG प्रमोद कुमार वर्मा के निर्देश पर ASP अनु बेनीवाल को सौंपी गई थी।

यानी एक तरफ हत्या प्रकरण में कथित जांच लापरवाही और जमीन का मामला, तो दूसरी तरफ कथित अवैध वसूली की शिकायत—इन दोनों मामलों ने विभागीय स्तर पर CSP की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए।

थानों का प्रभार छीना, ड्राइवर भी निलंबित

विवाद बढ़ने के बाद CSP नेहा पच्चीसिया से कई थानों का प्रभार वापस लिया गया। उनके सरकारी ड्राइवर केशव सिंह को भी निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। बाद में नेहा पच्चीसिया ने प्रशासनिक प्रभार वापस लिए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अदालत ने पुलिस के प्रशासनिक कार्य-विभाजन में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

अब असली सवाल—खाकी के भीतर कौन-कौन था शामिल?

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो क्या यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ तीन लोगों तक सीमित था?

किसने हत्या के मामले की जांच की?
चार्जशीट समय पर क्यों नहीं पहुंची?
जमानत के बाद जमीन के सौदे का दबाव किसने बनाया?
मारूफ अहमद हनफी को जमीन किस आधार पर मिली?
क्षितिज राज बारापत्रे के खाते में रकम क्यों पहुंची?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या किसी अन्य पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की भी भूमिका थी?

इन सभी सवालों के जवाब अब जांच से सामने आने हैं।

फिलहाल CSP नेहा पच्चीसिया, मारूफ अहमद हनफी और क्षितिज राज बारापत्रे के खिलाफ FIR दर्ज होना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। लेकिन FIR अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करती। अंतिम सच पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

फिर भी इस मामले ने जबलपुर IG प्रमोद कुमार वर्मा के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है—जांच सिर्फ तीन आरोपियों तक सीमित रहती है या उस पूरे पुलिस तंत्र की जवाबदेही भी तय होती है, जिसके रहते एक हत्या के मामले से जुड़ी जमीन का कथित करोड़ों रुपये का विवाद इतना आगे पहुंच गया।

Related Articles

Back to top button