जिस उम्र में बेटी को सपने देखने थे, उस उम्र में झेला दरिंदों का दर्द! थाने पहुंची तो शहपुरा पुलिस बनी सहारा, आरोपियों पर कसा शिकंजा
14 साल की मासूम ने डर को हराया, परिवार के साथ पहुंची थाने—पुलिस ने सुनी बेटी की आवाज

जबलपुर। जिस उम्र में एक बेटी के हाथ में किताबें और आंखों में अपने भविष्य के सपने होने चाहिए, उसी उम्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग को कथित तौर पर ऐसे दर्द से गुजरना पड़ा, जिसकी कल्पना करना भी किसी के लिए आसान नहीं है। दुष्कर्म, धमकी और ब्लैकमेलिंग के आरोपों से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद पूरे समाज को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है।
सबसे बड़ी बात यह रही कि पीड़िता डर और मानसिक दबाव के बावजूद चुप नहीं रही। उसने हिम्मत जुटाई, अपने परिवार को आपबीती बताई और परिवार के साथ शहपुरा थाना पहुंची। यहीं से पुलिस की कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ी।
थाने पहुंची बेटी तो पुलिस ने दिखाई संवेदनशीलता,
मामला सामने आते ही थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे ने इसे गंभीरता से लिया। नाबालिग से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई शुरू की और आरोपियों की तलाश में अपनी टीम को लगाया।
इस पूरे मामले की विवेचना और कार्रवाई में सब इंस्पेक्टर रितु उपाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे के निर्देशन में शहपुरा थाना पुलिस टीम ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए।
पुलिस के मुताबिक मामले में निखिल सिंह राजपूत, संदीप चौहान, प्रशांत पटेल, सौरभ सिंह और एक अन्य नाबालिग का नाम सामने आया है। मुख्य आरोपी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार/अभिरक्षा में लिया गया है। नाबालिग आरोपी के संबंध में कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाई गई है।
कथित वीडियो को बनाया डर का हथियार,
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी की पीड़िता से स्कूल में पहचान हुई थी। आरोप है कि बाद में उसे सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया गया और कथित तौर पर वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी गई। आरोप है कि इसी डर को हथियार बनाकर पीड़िता का लगातार शोषण किया गया।
सोचिए, एक 14 साल की बच्ची किस मानसिक स्थिति से गुजरी होगी—हर पल डर, हर पल धमकी और समाज के डर के बीच अपने दर्द को अपने भीतर दबाए रखना। लेकिन आखिरकार उस बेटी ने चुप्पी तोड़ी। उसने अपनी आवाज अपने परिवार तक पहुंचाई और परिवार उसे लेकर पुलिस के पास पहुंचा।
एक बेटी की आवाज बनी पुलिस के लिए जिम्मेदारी,
शहपुरा थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे के निर्देशन में SI रितु उपाध्याय और शहपुरा थाना पुलिस टीम ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। पुलिस ने आरोपियों की तलाश के साथ मामले से जुड़े डिजिटल और अन्य साक्ष्यों को जुटाना शुरू किया।
मोबाइल फोन और कथित वीडियो सहित अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि मामले की हर कड़ी सामने आ सके और प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भूमिका कानून के सामने रखी जा सके।
दरिंदों के खिलाफ समाज को भी खड़ा होना होगा,
यह मामला सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है। यह पूरे समाज के लिए आईना है। हमारी बेटियां जब स्कूल जाती हैं तो उनके साथ सिर्फ किताबें नहीं होतीं, उनके साथ परिवार के सपने होते हैं। किसी भी बेटी की मासूमियत को धमकी, ब्लैकमेलिंग या हिंसा से कुचलने की कोशिश समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
ऐसे आरोपों का सामना कर रहे लोगों के खिलाफ कानून अपना काम करेगा और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम अधिकार न्यायालय का है।
पुलिस पर भरोसा ही बेटी की सबसे बड़ी ताकत,
इस पूरे मामले में थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे, विवेचना अधिकारी SI रितु उपाध्याय और शहपुरा थाना पुलिस टीम की तत्परता ने यह संदेश जरूर दिया है कि जब कोई बेटी डर के बावजूद अपनी आवाज उठाती है, तो उसे अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि पीड़िता को यह भरोसा देना भी है कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसकी पहचान, गरिमा और सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है। एक 14 साल की बेटी ने डर के सामने हार नहीं मानी। उसने अपनी चुप्पी तोड़ी। थाने तक पहुंची। और अब कानून उसके साथ खड़ा है।
उस बेटी के आंसू शायद शब्दों में बयान न किए जा सकें, लेकिन उसकी हिम्मत समाज के लिए एक बड़ा संदेश है, गलत के खिलाफ आवाज उठाने वाली हर बेटी अकेली नहीं है।
नाबालिग पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है। मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है तथा आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगी।



