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संवेदनाओं की पाठशाला बना मोक्ष आश्रम, आशीष ठाकुर की पहल ने बच्चों को सिखाया इंसानियत का असली अर्थ, लावारिस बुजुर्गों के बीच पहुंचे सैकड़ों छात्र, किसी ने थामा हाथ तो किसी ने पाया अपना परिवार

संवेदनाओं की पाठशाला बना मोक्ष आश्रम, आशीष ठाकुर की पहल ने बच्चों को सिखाया इंसानियत का असली अर्थ, लावारिस बुजुर्गों के बीच पहुंचे सैकड़ों छात्र, किसी ने थामा हाथ तो किसी ने पाया अपना परिवार

जबलपुर। शहर की भागदौड़ और औपचारिक शिक्षा के बीच शनिवार को मोक्ष आश्रम, मेडिकल में एक ऐसी पहल देखने को मिली, जिसने इंसानियत की गहराई को छू लिया। मोक्ष मानव सेवा एवं जन उत्थान समिति के संस्थापक आशीष ठाकुर की प्रेरणा से गंगानगर स्थित ज्ञानोदय स्कूल के सैकड़ों छात्र-छात्राएं आश्रम पहुंचे और यहां लावारिस जीवन जी रहे बुजुर्गों के साथ समय बिताया। यह मुलाकात एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनाओं का जीवंत संवाद बन गई।

आशीष ठाकुर की पहल ने जोड़े टूटे रिश्ते-
आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के लिए यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं रहा। जैसे ही बच्चों की चहल-पहल परिसर में गूंजी, सूनी आंखों में चमक लौट आई। कई बुजुर्ग बच्चों को देखकर भावुक हो उठे। किसी ने उन्हें गले लगाकर अपनेपन का एहसास किया तो किसी ने हाथ पकड़कर देर तक बातें कीं। आशीष ठाकुर की यह पहल उन रिश्तों की कमी को कुछ पलों के लिए भर गई, जो समय और परिस्थितियों ने उनसे छीन ली थी।


नन्हें कदम, बड़ा संदेश-
बच्चे अपने घरों से बिस्किट, कपड़े, चावल और आटा जैसी आवश्यक सामग्री लेकर पहुंचे थे। उन्होंने आश्रम की रसोई, रहन-सहन और सेवा कार्यों को करीब से देखा। इस अनुभव ने उन्हें जीवन की उस सच्चाई से रूबरू कराया, जो किताबों से परे है। कई विद्यार्थियों ने भावुक होकर कहा कि यह दिन उनके लिए यादगार रहेगा और वे आगे भी ऐसे सेवा कार्यों से जुड़ना चाहते हैं।


संवेदनशील समाज की ओर एक प्रयास-
ज्ञानोदय स्कूल के संचालक मुकेश साहू के मार्गदर्शन में कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों का यह शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। उद्देश्य था नई पीढ़ी को सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास कराना। आशीष ठाकुर ने बच्चों को मोक्ष आश्रम की कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला और जनसहयोग की अपील की। इस दौरान कई बच्चों ने भविष्य में समाज सेवा के लिए संकल्प भी लिया।

अंतिम सफर में भी नहीं छोड़ा साथ-
इसी दिन मोक्ष समिति ने एक और मानवीय दायित्व निभाते हुए थाना भेड़ाघाट की सूचना पर 75 वर्षीय अमर केवट का ससम्मान अंतिम संस्कार किया। त्रिपुर सुंदरी मंदिर के पास वर्षों से एक झोपड़ी में रह रहे अमर केवट के निधन के बाद जब कोई परिजन सामने नहीं आया, तब मोक्ष आश्रम आगे आया। तिलवारा घाट श्मशान में पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान अधिवक्ता अमर गुप्ता, सचिन स्वामी, पार्षद राजू पटेल सहित अन्य सामाजिकजन मौजूद रहे। यह पहल न केवल बच्चों के लिए एक सीख बनी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि इंसानियत जिंदा है बस उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है।

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