कपिल सिब्बल का बड़ा ऐलान: CJP को देंगे कानूनी मदद, छात्रों के लिए ₹1 करोड़ का लीगल एड फंड घोषित
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों में मुफ्त कानूनी सहायता का वादा, देशभर के वकीलों से भी आगे आने की अपील

सेटन्यूज़, डेस्क। NEET-UG पेपर लीक आंदोलन के बाद छात्रों पर दर्ज एफआईआर और विभिन्न राज्यों में जारी पुलिस कार्रवाई के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद *कपिल सिब्बल* ने बड़ा कदम उठाते हुए छात्र प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने की घोषणा की है। CJP के नेताओं के साथ आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों को कानूनी लड़ाई में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने इस उद्देश्य के लिए *₹1 करोड़* की प्रारंभिक सहायता देने की घोषणा की और देशभर के अधिवक्ताओं से भी इस अभियान में योगदान देने की अपील की।
प्रेस वार्ता में CJP के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में कई छात्रों पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है या उन्हें पूछताछ और हिरासत का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि यह उस आश्वासन के विपरीत है जिसके आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया था। इसी पृष्ठभूमि में CJP ने एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म शुरू करने की घोषणा की है, जहां ऐसे मामलों का रिकॉर्ड रखा जाएगा और प्रभावित छात्रों को अधिवक्ताओं से जोड़ा जाएगा।
कपिल सिब्बल ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और यदि ऐसे प्रदर्शनकारियों पर कानून का दुरुपयोग करते हुए कार्रवाई की जाती है, तो उन्हें प्रभावी कानूनी सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित वेबसाइट पर देशभर के वे अधिवक्ता भी अपना पंजीकरण करा सकेंगे जो नि:शुल्क अथवा अन्य तरीके से कानूनी सहायता देना चाहते हैं। उनका उद्देश्य विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों की निगरानी करना और जरूरतमंद छात्रों तक समय पर कानूनी मदद पहुंचाना है।
CJP के संस्थापक *अभिषेक दीपके* और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि आंदोलन के दौरान ही उन्हें आशंका थी कि बाद में अलग-अलग राज्यों में छात्रों के विरुद्ध कार्रवाई हो सकती है। संगठन का दावा है कि इसलिए पहले से ही वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी परामर्श लिया गया था। अब यदि किसी भी राज्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होती है तो उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही संगठन ने सरकार से सभी लंबित मामलों की समीक्षा कर निर्दोष छात्रों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग दोहराई।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का रुख यह रहा है कि कानून-व्यवस्था और आपराधिक मामलों में कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। सरकार पहले भी कह चुकी है कि प्रत्येक मामले का निर्णय उपलब्ध तथ्यों और कानून के अनुरूप होगा तथा किसी भी प्राथमिकी को वापस लेने या आगे बढ़ाने का निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कपिल सिब्बल की यह पहल छात्र आंदोलन को कानूनी स्तर पर नया आयाम दे सकती है। यदि विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों की संख्या बढ़ती है, तो यह कानूनी सहायता नेटवर्क प्रभावित छात्रों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं, इस घटनाक्रम ने छात्र आंदोलनों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।



