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(राष्ट्रीय) खतरे में जगद्गुरु की ‘पीठ’ और परंपरा: रामभद्राचार्य का बड़ा बयान, आशुतोष ब्रह्मचारी पर लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ में दर्ज शिकायत, शिष्य रामचंद्र दास को फंसाने की साजिश का आरोप, प्रधानमंत्री-सीएम से जांच की मांग

सेटन्यूज़, डेस्क। चित्रकूट तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर और पद्मविभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपनी और अपनी पीठ की सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी पर आरोप लगाया कि उनकी और उनके उत्तराधिकारी रामचंद्र दास की छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है। जगद्गुरु ने कहा कि ‘मुझे और मेरी पीठ को खतरा है’।

यह विवाद 8 जून 2026 को सामने आया जब एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में आशुतोष ब्रह्मचारी ने उत्तराधिकारी रामचंद्र दास पर यौन शोषण समेत गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी साजिश उन्हें और उनकी परंपरा को बदनाम करने के लिए रची गई है।

रामभद्राचार्य ने यह भी बताया कि इससे पहले लखनऊ में एक घटना हुई थी। आरोप है कि रामचंद्र दास ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया था। इस मामले में सैरपुर थाने में पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।

एक निजी चैनल के रिपोर्ट के अनुसार, आशुतोष ब्रह्मचारी ने उत्तराधिकारी पर जगद्गुरु की हत्या की साजिश का भी आरोप लगाया और प्रशासन, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से जांच की मांग की है।

कौन हैं रामभद्राचार्य
जगद्गुरु रामभद्राचार्य का पूर्वाश्रम नाम गिरिधर मिश्र है। उनका जन्म 1950 में जौनपुर जिले के सराय भोगी गांव में हुआ था। दो माह की आयु में ही उनकी नेत्र ज्योति चली गई थी, इसके बावजूद वे 22 भाषाओं के ज्ञाता हैं। वे 1988 से जगद्गुरु रामानन्दाचार्य पद पर प्रतिष्ठित हैं। उन्होंने 250 से अधिक पुस्तकों की रचना की है और 2015 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

वे चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति भी हैं। फरवरी 2024 में हाथरस में रामकथा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी थी। सीने में दर्द और फेफड़ों में संक्रमण के कारण उन्हें आगरा के पुष्पांजलि अस्पताल में भर्ती कराया गया था, फिर एयर एंबुलेंस से देहरादून ले जाया गया।

जगद्गुरु ने कहा कि वे अपने तपोबल से 24 वर्ष और रहेंगे। फिलहाल इस मामले में लखनऊ पुलिस की जांच जारी है। अनुयायियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे पीठ की अंदरूनी राजनीति बता रहे हैं, वहीं कई अनुयायी जगद्गुरु के समर्थन में उतर आए हैं।

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