जबलपुर: अवैध शराब के असली सरगना कौन? छोटे तस्कर गिरफ्तार, ठेकेदारों पर कार्रवाई अब तक क्यों नहीं
अवैध शराब के असली सरगना कौन? छोटे तस्कर गिरफ्तार, ठेकेदारों पर कार्रवाई अब तक क्यों नहीं

जबलपुर में अवैध शराब का कारोबार लगातार पुलिस कार्रवाई के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहा। अधारताल और केण्ट थाना पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में भारी मात्रा में देशी शराब के साथ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर सैकड़ों पाव शराब आरोपियों तक पहुंची कैसे? क्या शराब ठेकेदारों और दुकानदारों की मिलीभगत से यह काला कारोबार चल रहा है? अब कार्रवाई सिर्फ छोटे तस्करों पर नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क पर उठने लगी है।
पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के निर्देश पर जिलेभर में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध जितेन्द्र सिंह और नगर पुलिस अधीक्षक अधारताल राजेश्वरी कौरव के मार्गदर्शन में अधारताल थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गुलशन चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया।
थाना प्रभारी अधारताल प्रवीण कुमरे के मुताबिक आरोपी रिछाई पुल से खैरी की ओर शराब सप्लाई करने जा रहा था। पहले उसके पास 18 पाव शराब मिली, लेकिन पूछताछ में पुल के नीचे छिपाकर रखी गई 300 पाव शराब भी बरामद हुई। कुल 318 पाव देशी शराब जब्त की गई। आरोपी गुलशन चक्रवर्ती पर पहले से 26 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
वहीं दूसरी कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात अंजना तिवारी और नगर पुलिस अधीक्षक केण्ट उदयभान बागरी के मार्गदर्शन में केण्ट थाना पुलिस ने दिलीप कुकरेजा को गिरफ्तार किया।
थाना प्रभारी केण्ट पुष्पेन्द्र पटले ने बताया कि आरोपी मेंहदीबाग के पीछे खंडहर क्षेत्र में अवैध शराब बेचने की तैयारी में था। पुलिस ने दबिश देकर उसके कब्जे से 320 पाव देशी शराब बरामद की।
लेकिन इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद अब कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में शराब कहां से लाई गई? क्या यह शराब सरकारी ठेकों से चोरी-छिपे बाहर निकाली जा रही थी? क्या स्थानीय शराब दुकानदार और ठेकेदार इस पूरे खेल में शामिल हैं?
शहर में चर्चा है कि बिना संरक्षण के इतनी बड़ी मात्रा में शराब का अवैध कारोबार संभव नहीं। पुलिस ने दोनों आरोपियों को तो पकड़ लिया, लेकिन अब नजरें उन शराब माफियाओं और ठेकेदारों पर टिकी हैं जिनकी सप्लाई से यह नेटवर्क चल रहा था। सवाल यह भी है कि क्या आबकारी विभाग और संबंधित जिम्मेदार लोग इस पूरे मामले से अनजान थे या फिर सब कुछ जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई?
जबलपुर में लगातार पकड़ी जा रही अवैध शराब अब सिर्फ तस्करों की कहानी नहीं रह गई है। मामला अब शराब ठेकेदारों, सप्लाई नेटवर्क और संरक्षण देने वालों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। शहर पूछ रहा है कि आखिर असली सरगनाओं पर कार्रवाई कब होगी और अवैध शराब के इस खेल पर पूरी तरह लगाम कब लगेगी।



