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जबलपुर में मौत का त्रिकोण—कहीं फंदे पर टूटी सांसें, तो कहीं सड़क पर बिखरा खून; तीन घरों में पसरा सन्नाटा
कुण्डम से संजीवनी नगर तक अकाल मृत्यु का तांडव, दो घरों में फांसी का फंदा, सड़क पर हादसे ने छीनी जिंदगी

संस्कारधानी जबलपुर के लिए बीता रविवार काल बनकर आया। जिले के तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई अकाल मौतों ने न केवल पुलिस महकमे को हलकान कर दिया, बल्कि पूरे शहर को गमगीन कर दिया है। कुण्डम, गोरखपुर और संजीवनी नगर—ये वो तीन इलाके हैं जहाँ से आई दुखद खबरों ने सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक मानसिक स्वास्थ्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं बंद कमरों के भीतर जिंदगी हार गई, तो कहीं रफ्तार के कहर ने एक युवक की दुनिया उजाड़ दी। आइए जानते हैं क्या है इन तीनों घटनाओं की पूरी दास्तान।
1. कुण्डम: खामोश कमरा और बल्ली से लटकता फंदा,पहला मामला: भाई की आँखों के सामने उजड़ा संसार,
पहली हृदयविदारक घटना थाना कुण्डम के ग्राम भोकादेवरी की है। यहाँ सुबह की पहली किरण के साथ ही मातम छा गया। 45 वर्षीय कमलेश झारिया, जो अपने परिवार का मजबूत आधार थे, उन्होंने अज्ञात कारणों के चलते मौत को गले लगा लिया। उनके छोटे भाई मिलन झारिया ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि रविवार सुबह करीब 6:30 बजे जब घर के लोग अपने कामों में व्यस्त थे, तभी कमलेश ने कमरे के अंदर म्यार (बल्ली) के सहारे कपड़े की रस्सी का फंदा बनाया और अपनी जान दे दी। जब परिजनों ने उन्हें इस हाल में देखा तो घर में कोहराम मच गया। कुण्डम पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को फंदे से नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। आखिर कमलेश ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया? क्या वह किसी मानसिक तनाव में थे? पुलिस इन तमाम पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है।
दूसरा मामला: थाना गोरखपुर – आधे घंटे में उजड़ गया सुहाग,
दूसरी घटना जबलपुर के व्यस्त इलाके गोरखपुर के मांडवा की है। यहाँ की कहानी और भी ज्यादा दर्दनाक है। मनोहर मराठा दोपहर 12 बजे अपनी पत्नी प्रीति मराठा की गाड़ी ठीक करवाने के लिए ब्रजमोहन नगर गए थे। घर पर उनकी 40 वर्षीय पत्नी प्रीति अकेली थीं। मनोहर महज आधा घंटे बाद यानी 12:30 बजे वापस लौटे। उन्होंने घर का मुख्य दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। अनहोनी की आशंका होने पर जब उन्होंने खिड़की से झांका, तो उनके होश उड़ गए। प्रीति फांसी के फंदे पर झूल रही थीं। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़कर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आधे घंटे के फासले में एक पूरा परिवार तबाह हो गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है कि आखिर उस आधे घंटे के भीतर ऐसा क्या हुआ जिसने प्रीति को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
तीसरा मामला: थाना संजीवनी नगर – डिवाइडर बना काल, रफ्तार, डिवाइडर और मौत की गूँज
तीसरी घटना संजीवनी नगर थाना क्षेत्र की है, जहाँ एक सड़क हादसे ने 36 साल के बसंत बर्मन की जान ले ली। बसंत, जो मूल रूप से कटनी जिले के रीठी के निवासी थे, यहाँ जबलपुर में रहकर अपनी आजीविका चला रहे थे। रविवार की रात करीब 12 बजे वह अपनी बाइक से जा रहे थे, तभी मड़फैया चौकी के पास उनकी बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बसंत के सिर और माथे पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। उनके भाई सुशील बर्मन रात भर डॉक्टरों की मिन्नतें करते रहे, लेकिन विधि का विधान कुछ और ही था। तड़के 3 बजे बसंत ने दम तोड़ दिया। यह हादसा हमें आगाह करता है कि रात के सफर में जरा सी लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है।
इन तीनों ही घटनाओं ने जबलपुर पुलिस को जांच के मोर्चे पर लगा दिया है। कुण्डम और गोरखपुर में जहाँ आत्महत्या के पीछे छिपे ‘साइकलॉजिकल’ कारणों को तलाशा जा रहा है, वहीं संजीवनी नगर में सड़क सुरक्षा के मानकों पर बात हो रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। लेकिन सच्चाई यही है कि इन तीन अकाल मौतों ने तीन परिवारों को उम्र भर का जख्म दे दिया है।



