“देर रात शराब बिक्री बन रही खूनी वारदातों की वजह? पनागर की घटना ने खड़े किए बड़े सवाल”
आधी रात शराब बिक्री से बढ़ रही खूनी वारदातें! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा मौत का खेल?”

जबलपुर के पनागर थाना क्षेत्र में आधी रात शराब पार्टी के दौरान हुए खूनी हमले ने एक बार फिर अवैध रूप से देर रात तक चल रही शराब बिक्री और उससे बढ़ रहे अपराधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भडपुरा क्षेत्र में शराब के पैसों को लेकर हुए विवाद में जीजा ने अपने साथी के साथ मिलकर साले पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस वारदात के बाद अब स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर रात में शराब बिकने की जिम्मेदारी किसकी है और इन बढ़ती चाकूबाजी की घटनाओं का असली जिम्मेदार कौन है?
जानकारी के अनुसार बजरंग वार्ड देवरी निवासी संतोष ठाकुर को उसके जीजा यशपाल ठाकुर ने देर रात मझोली बाईपास बुलाया था। दोनों अपने एक साथी के साथ बैठकर शराब पी रहे थे। रात करीब 2 बजे शराब खत्म होने पर और शराब खरीदने के लिए पैसों को लेकर विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते मामला खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि यशपाल ठाकुर ने अपने साथी के साथ मिलकर संतोष पर चाकुओं से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आधी रात के बाद शराब उपलब्ध कैसे हुई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई क्षेत्रों में नियमों के विपरीत देर रात तक शराब बेची जा रही है। शराब दुकानों के आसपास अवैध तरीके से शराबखोरी होती है और देर रात तक नशे का माहौल बना रहता है। यही कारण है कि छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़कर चाकूबाजी और जानलेवा हमलों तक पहुंच रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शराब ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों की मनमानी के कारण शहर में अपराध बढ़ रहे हैं। आरोप है कि दुकान बंद होने के बाद भी पीछे के रास्तों और अवैध माध्यमों से शराब बेची जाती है। यदि समय पर निगरानी और सख्ती हो, तो इस तरह की वारदातों पर रोक लगाई जा सकती है।
इधर पनागर थाना पुलिस ने घायल संतोष ठाकुर के बयान के आधार पर आरोपी यशपाल ठाकुर और उसके साथी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर शहर में देर रात तक चल रही शराबखोरी पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि नियमों का पालन सख्ती से कराया जाता, तो शायद एक और परिवार इस खूनी संघर्ष का शिकार नहीं बनता।



