ISBT जवान और कानपुर पुलिस विवाद: इंसाफ की मांग ने बढ़ाया सियासी और प्रशासनिक तापमान
मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा जवान, पूरे मामले ने पकड़ा तूल

सेटन्यूज़, डेस्क। उत्तर प्रदेश के Kanpur में इन दिनों ITBP जवान और पुलिस प्रशासन के बीच उपजा विवाद सुर्खियों में है। मामला उस समय गरमा गया जब ITBP के जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। इस घटना के बाद बड़ी संख्या में ITBP जवानों के कमिश्नरेट पहुंचने से पूरे शहर में हलचल मच गई।
जानकारी के मुताबिक, ITBP की 32वीं बटालियन में तैनात जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी को 13 मई को सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान मेडिकल लापरवाही हुई, जिससे उनके हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया। हालत बिगड़ने के बाद दूसरे अस्पताल में डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग के बावजूद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई। इसी नाराजगी के चलते जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा, जिसने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर की चर्चा बना दिया।
50 से ज्यादा जवान पहुंचे कमिश्नरेट, मची अफरा-तफरी
23 मई को अचानक 40 से 50 से अधिक ITBP जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि जवान हथियारों के साथ पहुंचे थे, जिससे परिसर में सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। हालांकि बाद में पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कोई घेराबंदी या कब्जे जैसी स्थिति नहीं थी, बल्कि साथी जवान के समर्थन में अधिकारी बातचीत करने पहुंचे थे।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया। कई लोगों ने इसे “सिस्टम के खिलाफ जवानों का गुस्सा” बताया, जबकि प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की।
जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल
मामले में स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट से ITBP अधिकारियों और परिवार ने असहमति जताई। उनका आरोप है कि रिपोर्ट में संक्रमण फैलने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं की गई और अस्पताल प्रबंधन को बचाने की कोशिश की गई।
इसके बाद पुलिस प्रशासन ने दोबारा जांच कराने का आश्वासन दिया। अपर पुलिस आयुक्त ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रशासन की सफाई
Indo-Tibetan Border Police और Uttar Pradesh Police के बीच टकराव जैसी खबरों के बाद कानपुर पुलिस ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि किसी प्रकार की हिंसक स्थिति या कमिश्नरेट घेरने जैसी बात सही नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, जवान अपने साथी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आए थे और बातचीत के बाद मामला शांत हो गया।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी और निजी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर इलाज के दौरान इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और पीड़ित परिवार को समय पर न्याय क्यों नहीं मिला।
राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज
कानपुर का यह मामला अब केवल एक मेडिकल लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता और सिस्टम की विफलता का उदाहरण बताया है। वहीं, आम जनता में भी इस घटना को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
घटना के वीडियो वायरल होने के बाद #ITBP, #KanpurPolice और #JusticeForJawan जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे। बड़ी संख्या में लोगों ने जवान के समर्थन में पोस्ट किए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।



