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लद्दाख में वायरल मैसेज पर नया विवाद, LG की चेतावनी वाली पोस्ट पर सोनम वांगचुक का पलटवार

सोशल मीडिया में वायरल दावे पर बढ़ी सियासी गर्मी, वांगचुक बोले “घटना को गलत तरीके से पेश किया गया”

सेटन्यूज़, डेस्क। लद्दाख में एक बार फिर सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk तथा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के बीच विवाद तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक कथित “चेतावनी संदेश” तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया कि लद्दाख के उपराज्यपाल ने सोनम वांगचुक को भड़काऊ बयानबाजी और आंदोलनकारी राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी है। कई अखबारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने भी इस संदेश को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।

हालांकि, इस वायरल दावे पर अब खुद सोनम वांगचुक ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से मुलाकात और बातचीत को प्रस्तुत किया गया, वह वास्तविक घटनाक्रम से मेल नहीं खाता। वांगचुक ने साफ कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की “फटकार” या “चेतावनी” को स्वीकार नहीं किया और सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें संदर्भ से हटकर फैलाई जा रही हैं।

“उत्तेजक और भ्रामक नैरेटिव” से बचने की सलाह
दरअसल यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब लद्दाख प्रशासन की ओर से जारी बयान और सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि उपराज्यपाल ने सोनम वांगचुक को “उत्तेजक और भ्रामक नैरेटिव” से बचने की सलाह दी है। पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि लगातार विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी से पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।

वांगचुक को सीधे तौर पर दी चेतावनी 
इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दावा फैलने लगा कि एलजी ने वांगचुक को सीधे तौर पर चेतावनी दी है। कई यूजर्स ने इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया, जबकि कुछ लोगों ने प्रशासन के रुख का समर्थन भी किया। इसी बीच “Cockroach Janta Party” और उससे जुड़े व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान को लेकर भी बहस तेज हो गई।

बातचीत को राजनीतिक संदेश में बदल दिया
सोनम वांगचुक ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई थी, लेकिन बाद में जिस भाषा में सार्वजनिक पोस्ट जारी की गई, उससे वे स्वयं आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत हुआ जैसे बातचीत को राजनीतिक संदेश में बदल दिया गया हो। वांगचुक ने यह भी दोहराया कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग पर कायम हैं।

अब भी भरोसे की कमी को लेकर तनाव 
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब लद्दाख में राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल किए जाने और स्थानीय युवाओं के अधिकारों को लेकर आंदोलन लगातार चर्चा में है। हाल के महीनों में केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई है, लेकिन भरोसे की कमी और पुराने मामलों को लेकर तनाव अब भी बना हुआ है।

चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा
उधर प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजनाओं, जल संरक्षण योजनाओं और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक माहौल जरूरी है। वहीं आंदोलनकारी समूहों का आरोप है कि लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकार और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

मुलाकात को बढ़ा-चढ़ाकर किया गया पेश
सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज को लेकर अब दो तरह की तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर प्रशासनिक बयान है जिसमें “भड़काऊ नैरेटिव” से बचने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर सोनम वांगचुक का दावा है कि मुलाकात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और वास्तविक बातचीत का स्वर अलग था। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर सोशल मीडिया पोस्ट और आधिकारिक बयान किस तरह जनमत को प्रभावित कर रहे हैं।

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