जबलपुर में अवैध शराब का ‘माफिया नेटवर्क’ बेनकाब: आबकारी विभाग, ठेकेदार और थाना पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
खुलेआम चल रहे अवैध आहाते, ओवर रेटिंग का खेल जारी; दुकान बंद होने के बाद भी रातभर बिक रही शराब शराब दुकानों की खिड़कियों से रातभर सप्लाई, अवैध आहातों में खुलेआम जाम का दौर

जबलपुर में अवैध शराब का कारोबार अब एक संगठित नेटवर्क की शक्ल ले चुका है, जो शहर के अलग-अलग इलाकों में खुलेआम सक्रिय बताया जा रहा है। बरेला से लेकर बिलुम चौक, अमखेरा, विजयनगर, आईटीआई, दीनदयाल, कटंगी बाईपास, अधारताल, महाराजपुर, गोसलपुर, रद्दी चौकी, गोरा बाजार और पेंटीनाका तक रातभर अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी गतिविधियों के बावजूद आबकारी विभाग, शराब ठेकेदार और थाना क्षेत्र की पुलिस क्यों मौन बनी हुई है?
शहर के कई इलाकों में अवैध शराब बिक्री को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब ठेकेदारों के संरक्षण में प्रिंट रेट को दरकिनार कर खुलेआम ओवर रेटिंग की जा रही है। कई जगह तो हालात ऐसे हैं कि दुकान बंद होने के बाद भी खिड़कियों से शराब की अवैध सप्लाई जारी रहती है और देर रात तक अवैध आहाते संचालित किए जा रहे हैं।
बरेला क्षेत्र में हाल ही में सामने आए मामलों के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि शराब दुकानों पर तैनात स्टाफ ग्राहकों से निर्धारित दर से अधिक राशि वसूल रहा है। वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी खुली लूट पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिलुम चौक, अमखेरा, विजयनगर, आईटीआई, दीनदयाल, कटंगी बाईपास, अधारताल, महाराजपुर, गोसलपुर, रद्दी चौकी, गोरा बाजार और पेंटीनाका जैसे इलाकों में रात के समय अवैध शराब बिक्री एक सामान्य गतिविधि बन चुकी है। कई जगहों पर बिना लाइसेंस के आहाते चल रहे हैं, जहां देर रात तक शराबखोरी का माहौल बना रहता है।
सबसे गंभीर आरोप यह भी हैं कि यह पूरा नेटवर्क सिर्फ छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि शराब ठेकेदारों और सप्लाई सिस्टम की मिलीभगत से चल रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सब आबकारी विभाग की जानकारी के बिना संभव है, या फिर विभागीय लापरवाही के कारण यह पूरा खेल चल रहा है?
इसके साथ ही स्थानीय थाना क्षेत्रों की पुलिस पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिन इलाकों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, वहां पुलिस की मौजूदगी और कार्रवाई बेहद कमजोर बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती बरती जाती तो यह नेटवर्क इतना मजबूत नहीं हो पाता।
आरोप यह भी हैं कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है और जमीनी स्तर पर अवैध शराब माफिया बेखौफ होकर अपना कारोबार चला रहे हैं। इससे न सिर्फ कानून व्यवस्था पर असर पड़ रहा है, बल्कि आमजन की सुरक्षा और सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है।

जबलपुर में अवैध शराब का यह फैलता नेटवर्क अब सिर्फ कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि आबकारी विभाग, शराब ठेकेदारों और थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह अवैध कारोबार यूं ही बेखौफ चलता रहेगा।



