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जबलपुर में कोहराम: निजी अस्पताल में नवजात की मौत के बाद परिजनों का भारी तांडव।, वर्दी का भी नहीं रहा खौफ: मौके पर पहुंची पुलिस टीम के साथ परिजनों ने की गाली-गलौज और बदसलूकी।

इलाज में लापरवाही का आरोप: बेसबॉल के डंडों से अस्पताल में तोड़फोड़, स्टाफ के साथ की मारपीट, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात: केबिन के कांच और खिड़कियां चकनाचूर, अस्पताल बना जंग का मैदान।

गुस्सा… चीख-पुकार और फिर शुरू हुआ तबाही का मंजर। जबलपुर के इस निजी अस्पताल की तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे चंद मिनटों में अस्पताल को मलबे में तब्दील कर दिया गया। एक तरफ मासूम की मौत का गम था, तो दूसरी तरफ अस्पताल की कथित लापरवाही का गुस्सा।

परिजनों ने कानून हाथ में लिया, बेसबॉल के डंडों से शीशे तोड़े और पुलिस से भी भिड़ गए। अब सवाल यह है कि क्या हिंसा से न्याय मिलेगा? पुलिस सीसीटीवी खंगाल रही है और सच जल्द ही सामने होगा।”

संस्कारधानी जबलपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवता और कानून, दोनों को शर्मसार कर दिया है। शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक नवजात शिशु की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने अस्पताल को ही तहस-नहस कर दिया।

 

जबलपुर का यह निजी अस्पताल आज सुबह किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा था। चारों तरफ टूटे हुए कांच, बिखरा हुआ फर्नीचर और दहशत में डूबा हुआ मेडिकल स्टाफ। हंगामा तब शुरू हुआ जब अस्पताल में भर्ती एक नवजात शिशु ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।

आरोप है कि परिजनों ने न केवल अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ गाली-गलौज की, बल्कि उनके पास मौजूद बेसबॉल के डंडों से अस्पताल की संपत्ति को निशाना बनाना शुरू कर दिया। अस्पताल के केबिन, रिसेप्शन काउंटर और खिड़कियों के कांच डंडों के प्रहार से चकनाचूर हो गए। यह पूरी घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसमें साफ दिख रहा है कि किस तरह उपद्रवियों ने कानून को अपने हाथ में लिया।

परिजनों का दावा है कि डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति को लेकर उन्हें अंधेरे में रखा और सही समय पर इलाज नहीं दिया। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन परिजनों का हिंसक रवैया किसी भी तरह से जायज नहीं है।”


हंगामे की खबर मिलते ही जब स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तो आक्रोशित भीड़ ने पुलिसकर्मियों को भी नहीं बख्शा। वर्दीधारी जवानों के साथ भी धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और अभद्रता की गई। स्थिति को बिगड़ता देख अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हुआ। पुलिस ने अब इस मामले में अस्पताल प्रबंधन और मृतक बच्चे के परिजनों, दोनों के पक्षों को सुना है।


फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तोड़फोड़ करने वाले लोगों की पहचान कर रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की एक टीम बच्चे के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी ताकि लापरवाही के आरोपों की सच्चाई सामने आ सके। यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि क्या अस्पताल में होने वाली किसी भी अनहोनी का समाधान हिंसा है? और क्या हमारे डॉक्टर और पुलिसकर्मी सुरक्षित हैं?


जबलपुर की इस घटना ने एक बार फिर डॉक्टर और मरीजों के परिजनों के बीच बढ़ते अविश्वास की खाई को उजागर कर दिया है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस खबर पर हमारी नजर लगातार बनी रहेगी।

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