Latest News

जबलपुर में गोरखपुर थाना पुलिस की खामोशी या अपराधियों को संरक्षण? गोरखपुर पुलिस की लापरवाही ने बहाया खून

खाकी की खामोशी या अपराधियों को संरक्षण? गोरखपुर पुलिस की लापरवाही ने बहाया खून

जबलपुर का रामपुर मांडवा इलाका आज दहल उठा है, लेकिन इस दहशत की गूंज केवल अपराधियों के खौफ की नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की उस गहरी नींद की है जिसने एक हँसते-खेलते परिवार को बर्बादी की कड़वाहट चखा दी। 10 साल पुराना रिश्ता जब दहेज की भेंट चढ़ने लगा, तो पीड़ित पक्ष न्याय की उम्मीद में गोरखपुर थाने पहुँचा। 5 दिन पहले दी गई शिकायत में साफ अंदेशा था कि अनहोनी हो सकती है, लेकिन अफसोस! खाकी वर्दी ने उस शिकायत को रद्दी का टुकड़ा समझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया। क्या पुलिस किसी लाश के गिरने का इंतज़ार कर रही थी?

रक्षक पर हमला और कानून का जनाजा,

जब पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, तो भाई आमिर अंसारी ने खुद बीच-बचाव कर अपनी बहन का घर बचाने की कोशिश की। लेकिन उसे क्या पता था कि ससुराल वाले खून के प्यासे हो चुके हैं। ससुर, सास और पति ने मिलकर जिस तरह आमिर के सिर पर तलवार से प्रहार किया, वह सरेआम कानून के जनाजे को निकालने जैसा था। आज आमिर मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस भरोसे पर है जो आम जनता पुलिस पर करती है।

व्यवस्था की विफलता पर कड़े सवाल
गोरखपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली आज कटघरे में है। सवाल उठता है कि जब शिकायत 5 दिन पहले दर्ज करा दी गई थी, तो पुलिस ने आरोपियों को थाने बुलाकर बाउंड (Bound) क्यों नहीं किया? क्या पुलिस की सुस्ती ने ही ससुराल पक्ष को यह संदेश दे दिया था कि ‘आप कुछ भी करो, हम हाथ नहीं डालेंगे’? दहेज प्रताड़ना के संवेदनशील मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद, जबलपुर पुलिस की यह टालमटोल वाली नीति अपराधियों के लिए एक ‘प्रोत्साहन’ साबित हुई है।
समाज का आक्रोश और न्याय की पुकार,
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि पुलिस समय रहते कदम उठाती, तो क्या आज एक भाई लहूलुहान होकर अस्पताल में पड़ा होता? पीड़ित परिवार अब दर-दर भटक रहा है और न्याय की गुहार लगा रहा है। पुलिस अब मामले की ‘जांच’ की बात कर रही है, लेकिन यह जांच उन अधिकारियों पर भी होनी चाहिए जिन्होंने शुरुआती शिकायत को नजरअंदाज किया। जब तक रक्षक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक ‘बेटी बचाओ’ जैसे नारे केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे।
जवाबदेही की मांग,
रामपुर मांडवा की यह तलवारबाजी की घटना पुलिस विभाग के माथे पर एक कलंक है। यह स्पष्ट रूप से ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ की नाकामी है। हम मांग करते हैं कि न केवल तलवार चलाने वाले दरिंदों को जेल भेजा जाए, बल्कि गोरखपुर थाने के उन लापरवाह अधिकारियों पर भी विभागीय जांच बिठाई जाए जिनकी ढिलाई की वजह से यह खूनखराबा हुआ। जबलपुर एसपी को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी और आमिर’ को पुलिस की गलती की सजा न भुगतनी पड़े।

Related Articles

Back to top button