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ट्रेनिंग पूरी, तैनाती गायब… बिजली विभाग में प्रशासनिक सुस्ती से हजारों युवा ठगे, छह माह की ट्रेनिंग के बाद भी नियुक्ति अटकी, अधीक्षण अभियंताओं की मनमानी से प्रक्रिया पटरी से उतरी
ट्रेनिंग पूरी, तैनाती गायब... बिजली विभाग में प्रशासनिक सुस्ती से हजारों युवा ठगे, छह माह की ट्रेनिंग के बाद भी नियुक्ति अटकी, अधीक्षण अभियंताओं की मनमानी से प्रक्रिया पटरी से उतरी

जबलपुर। मध्य प्रदेश बिजली विभाग में अव्यवस्था का ऐसा जाल सामने आया है, जिसमें प्रशिक्षण पूरा कर चुके हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य उलझकर रह गया है। छह माह की अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी होने के बावजूद फील्ड पोस्टिंग न मिलने से युवा दर-दर भटक रहे हैं, जबकि विभागीय मशीनरी चुप्पी साधे बैठी है।
जानकारी के मुताबिक इस पूरी गड़बड़ी की जड़ अधीक्षण अभियंताओं का गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। सेंट्रल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीटीआई) को समय पर जरूरी रिपोर्ट और जानकारी नहीं भेजी गई, जबकि मानव संसाधन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि हर माह रोटेशनल ट्रेनिंग की मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। लेकिन आदेशों को दरकिनार कर न तो शेड्यूल का पालन हुआ और न ही समय पर रिपोर्टिंग की गई, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह ठहर गई।
खाली पदों का बढ़ता दबाव-
विभाग में कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता, लाइन अटेंडर, लाइन ऑपरेटर और कार्यालयीन कर्मचारियों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्ति नहीं होने से कार्य व्यवस्था पर असर साफ दिखने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
क्षेत्रीय भेदभाव से बढ़ी नाराजगी-
सूत्र बताते हैं कि मध्य और पश्चिम क्षेत्र में इसी प्रक्रिया के तहत कई अभ्यर्थियों को तैनाती मिल चुकी है, जबकि अन्य क्षेत्रों में फाइलें तक आगे नहीं बढ़ी हैं। इस असमानता ने न केवल अभ्यर्थियों में रोष बढ़ाया है, बल्कि विभाग की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जवाबदेही पर सवाल, कार्रवाई शून्य-
जब विभागीय स्तर पर स्पष्ट निर्देश जारी थे, तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ यह बड़ा सवाल बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पूरे मामले में मिलीभगत या संरक्षण की आशंका भी जताई जा रही है।
अभ्यर्थियों में आक्रोश, आंदोलन की तैयारी-
नियुक्ति की राह देख रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर लीं, फिर भी उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुए तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
कब मिलेगा समाधान?-
प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक युवाओं का भविष्य यूं ही अटका रहेगा। फिलहाल विभाग की ओर से कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है, जिससे मामला और गरमाता जा रहा है।



