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हर महीने पहुंचता है पैसा, तभी रातभर चलती हैं शराब दुकानें!” शराब ठेकेदारों पर गंभीर आरोप — आबकारी और पुलिस की कथित सांठगांठ से फल-फूल रहा अवैध कारोबार

शराब ठेकेदारों पर गंभीर आरोप — आबकारी और पुलिस की कथित सांठगांठ से फल-फूल रहा अवैध कारोबार

जबलपुर शहर में अवैध शराब कारोबार को लेकर अब सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि शराब ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों के बीच भी खुलेआम चर्चाएं होने लगी हैं। शहर के कई इलाकों में यह दावा किया जा रहा है कि “हर चीज का पैसा जाता है”, इसलिए देर रात तक शराब बिक्री और अवैध आहातों का संचालन बेखौफ जारी रहता है। आरोप हैं कि शराब ठेकेदार कथित तौर पर आबकारी विभाग और कुछ पुलिसकर्मियों तक नियमित रकम पहुंचाते हैं, जिसके बदले नियम-कायदों को नजरअंदाज किया जाता है।

ओमती, अधारताल, विजयनगर, माढ़ोताल और गोराबाजार सहित कई थाना क्षेत्रों में शराब दुकानों के बाहर देर रात तक शराबियों की महफिलें सजती दिखाई देती हैं। दुकानें बंद होने के बाद भी पीछे के रास्तों से शराब बेची जाती है। कई जगह ठेकेदारों के कर्मचारी खुद लोगों को बैठाकर शराब पिलाते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि पुलिस और आबकारी विभाग सख्त कार्रवाई करें तो एक भी अवैध आहाता एक दिन नहीं चल सकता, लेकिन यहां हालात उल्टे दिखाई देते हैं।

रहवासियों का कहना है कि रात होते ही शराब दुकानों के आसपास अराजकता का माहौल बन जाता है। गाली-गलौज, मारपीट, चाकूबाजी और सड़क पर हंगामा आम बात हो चुकी है। महिलाओं और परिवारों का निकलना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद न तो आबकारी विभाग कोई स्थायी कार्रवाई करता है और न ही पुलिस की ओर से सख्ती दिखाई देती है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर मामला शांत कर दिया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक शराब कारोबारियों के बीच खुलेआम यह बात कही जाती है कि “सब सेटिंग से चलता है…”। आरोप यह भी हैं कि अवैध आहाते चलाने, देर रात शराब बेचने और नियमों के उल्लंघन के बदले कथित तौर पर मोटी रकम दी जाती है। यही वजह है कि कई दुकानों पर कार्रवाई होने के बाद भी अगले ही दिन वही हालात फिर नजर आने लगते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस चौकियों और मुख्य सड़कों के पास खुलेआम शराब परोसी जा रही है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं होती? क्या वाकई कार्रवाई पर पर्दा डालने के लिए पैसों का खेल चल रहा है? यदि नहीं, तो फिर लगातार शिकायतों और घटनाओं के बाद भी अवैध शराब कारोबार बंद क्यों नहीं हो पा रहा?

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन शराब ठेकेदारों, कर्मचारियों और अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं, उनकी भूमिका की जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध शराब कारोबार पर रोक नहीं लगी, तो शहर का माहौल और ज्यादा बिगड़ सकता है।

फिलहाल जबलपुर में शराब माफियाओं के बढ़ते हौसले और पुलिस-आबकारी विभाग पर लग रहे गंभीर आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर “सब सेट है…” का खेल यूं ही चलता रहेगा।

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