हाईवे पर पकड़ी गई बीयर ने खोली सिस्टम की पोल, गोदाम सील… फिर भी सप्लाई चालू! सील गोदामों के बाद भी दौड़ रही बीयर की खेप!
सील गोदाम के बाद भी बाजार में बीयर! आखिर सोम कंपनी का नेटवर्क अब भी कैसे सक्रिय? 62 लाख की बीयर पकड़ाई, सवालों के घेरे में शराब ठेकेदार और सिस्टम की निगरानी

SET NEWS जबलपुर ! मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में भोपाल-इंदौर हाईवे पर पकड़े गए 62 लाख रुपए की बीयर से भरे ट्रक ने अब सिर्फ अवैध शराब कारोबार ही नहीं, बल्कि प्रदेश की चर्चित सोम कंपनी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार द्वारा सोम कंपनी के बेयर हाउस और गोदामों पर कार्रवाई कर उन्हें सील किया जा चुका है, तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में बीयर आखिर बाजार तक कैसे पहुंच गई?
जावर थाना पुलिस ने हाईवे किनारे लावारिस हालत में खड़े ट्रक से 1,991 पेटियां जब्त कीं, जिनमें 47,784 बीयर केन भरी हुई थीं। पुलिस के मुताबिक करीब 23,892 लीटर बीयर जब्त की गई, जिसकी कीमत 62 लाख 11 हजार 920 रुपए बताई जा रही है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर गोदाम बंद और सील हैं, तो आखिर यह माल निकला कहां से?
लोगों में चर्चा है कि बिना बड़े संरक्षण के इतनी बड़ी मात्रा में शराब का परिवहन संभव नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है और अंदरखाने शराब का खेल अब भी जारी है? अगर सोम कंपनी के गोदाम सील हैं तो क्या कहीं और अवैध रूप से स्टॉक रखा गया था? क्या विभागीय निगरानी के बावजूद माल बाहर निकाला जा रहा था?

पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रक लावारिस मिला, लेकिन उसका चालक और कथित सप्लायर मौके से गायब थे। आखिर उन्हें पहले से भनक कैसे लगी? क्या किसी ने कार्रवाई की सूचना पहले ही पहुंचा दी थी? अगर पुलिस समय पर पहुंची थी तो आरोपी फरार कैसे हो गए? इन सवालों ने पुलिस और आबकारी विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश में शराब कारोबार बिना रसूखदार संरक्षण के नहीं चल सकता। इतनी बड़ी खेप का हाईवे तक पहुंचना और फिर लावारिस हालत में मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि इसके पीछे बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। अब सवाल सीधे सोम कंपनी और उससे जुड़े शराब ठेकेदारों पर उठ रहे हैं।

लोग पूछ रहे हैं कि क्या इस मामले में सिर्फ “अज्ञात आरोपी” बनाकर जांच पूरी कर दी जाएगी या फिर असली सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और कंपनी से जुड़े जिम्मेदार लोगों तक भी पुलिस पहुंचेगी? क्या सोम कंपनी के ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ होगी? अगर गोदाम सील थे तो फिर यह माल कहां से आया और किसके आदेश पर निकाला गया?
मुख्यमंत्री के नशा मुक्ति अभियान के बीच पकड़ी गई इतनी बड़ी खेप ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में अवैध शराब का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। अब जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पुलिस और आबकारी विभाग इस मामले में बड़े नामों को सामने लाएंगे या फिर मामला सिर्फ ट्रक जब्ती और अज्ञात आरोपी तक ही सीमित रह जाएगा।



