जबलपुर कलेक्ट्रेट में गूँजी न्याय की चीख: पार्षद मनीष पटेल पर ‘जमीन हड़पने’ का संगीन आरोप!
कलेक्ट्रेट में गूँजी न्याय की चीख: पार्षद मनीष पटेल पर 'जमीन हड़पने' का संगीन आरोप!

न्याय की उम्मीद जब दम तोड़ने लगती है, तो इंसान मौत को गले लगाने जैसा खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर हो जाता है। जबलपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई जिसने पूरे प्रशासन को हिला कर रख दिया। एक युवक ने सरेआम खुद पर मिट्टी का तेल डाल लिया। आरोप किसी मामूली शख्स पर नहीं, बल्कि सत्ता और राजनीति के गलियारों में रसूख रखने वाले कांग्रेस पार्षद मनीष पटेल पर हैं।

जबलपुर का कलेक्ट्रेट परिसर, जहाँ लोग न्याय की गुहार लेकर पहुँचते हैं, आज वहां चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था। संजीवनी नगर निवासी एक युवक, जो महीनों से दफ्तरों की धूल फांक रहा था, आज हाथ में केरोसिन की बोतल लेकर कलेक्ट्रेट पहुँचा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने खुद को आग लगाने की कोशिश की। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाई और युवक को पकड़ लिया।
(आरोपों ):
इस पूरे ड्रामे के पीछे की कहानी बेहद गंभीर है। पीड़ित युवक का सीधा आरोप है कि कांग्रेस पार्षद मनीष पटेल और उनके सहयोगी सिद्धार्थ गौतम ने उसके साथ करोड़ों की धोखाधड़ी की है। युवक का दावा है कि उसकी 2 एकड़ की कीमती जमीन, जिसकी कीमत बाजार में करोड़ों में है, उसे फर्जी तरीके से हड़प लिया गया। पीड़ित का कहना है— “मेरे जमीन के असली दस्तावेज छीन लिए गए और पार्षद मनीष पटेल को करीब 40 लाख रुपये में बेच दिए गए।” यह जमीन संजीवनी नगर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। आरोप सिर्फ जमीन हड़पने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवक ने पार्षद पर उसे डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के भी संगीन आरोप लगाए हैं।
(युवक का बयान):
(युवक रोते हुए और गुस्से में): “मैं थक चुका हूँ। मनीष पटेल और सिद्धार्थ गौतम ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। मेरी पुश्तैनी जमीन के कागज छीनकर बेच दिए गए। मैंने पुलिस को बताया, अधिकारियों को आवेदन दिया, लेकिन कोई नहीं सुनता क्योंकि वह पार्षद है। मुझे जान से मारने की धमकी दी जाती है। अब मेरे पास मरने के अलावा क्या रास्ता बचा है?”
(प्रशासनिक लापरवाही):
युवक की बातों ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित का कहना है कि उसने पहले भी कई बार थाने और वरिष्ठ अधिकारियों के चक्कर काटे, लेकिन रसूख के आगे उसकी हर शिकायत रद्दी की टोकरी में डाल दी गई। यही वजह थी कि आज उसने आत्मदाह जैसा आत्मघाती रास्ता चुना।



