जबलपुर में अवैध शराब पर पुलिस का शिकंजा, क्या ठेकेदारों की मिलीभगत से फल-फूल रहा काला कारोबार?
अवैध शराब पर पुलिस का शिकंजा, क्या ठेकेदारों की मिलीभगत से फल-फूल रहा काला कारोबार?

जबलपुर जिले में अवैध शराब कारोबार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। थाना शहपुरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को 350 पाव देशी शराब और एक्सिस वाहन के साथ गिरफ्तार किया है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में शराब आरोपी तक पहुंची कहां से? क्या इसके पीछे शराब ठेकेदारों और सप्लायरों का कोई नेटवर्क सक्रिय है?
पुलिस अधीक्षक जबलपुर सम्पत उपाध्याय के निर्देश पर जिलेभर में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सूर्यकांत शर्मा और एसडीओपी पाटन लोकेश डाबर के मार्गदर्शन में थाना शहपुरा पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की।
पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक काले-नीले रंग की एक्सिस वाहन में अवैध शराब भरकर डोभी-अहरोरा क्षेत्र में सप्लाई करने जा रहा है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी प्रवीण धुर्वे के नेतृत्व में टीम ने ग्राम नटवारा और बरगी-अहरोरा मार्ग पर घेराबंदी की।
ग्राम बरगी के पहले नहर पुलिया के पास पुलिस ने संदिग्ध वाहन को रोका। चालक वाहन छोड़कर भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम आकाश सिंह लोधी (22 वर्ष) निवासी ग्राम कनवास, शहपुरा बताया। वाहन की तलाशी लेने पर दो बोरियों में रखे 350 पाव देशी शराब बरामद हुई, जिसकी कीमत लगभग 27 हजार रुपए बताई जा रही है।
अब इस पूरे मामले में स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब बिना ठेकेदारों या सप्लाई चैन की मिलीभगत के बाजार तक कैसे पहुंच सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब कारोबार लंबे समय से सक्रिय है और इसके पीछे बड़े नेटवर्क की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 34(2) आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पूछताछ जारी है कि शराब कहां से लाई गई और किन लोगों तक इसकी सप्लाई होनी थी।
इस कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक आलोक सिंह ठाकुर, आरक्षक रवि कुमार और चालक राहुल गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अब देखना होगा कि पुलिस इस कार्रवाई को केवल छोटे सप्लायर तक सीमित रखती है या फिर अवैध शराब के पीछे जुड़े बड़े ठेकेदारों और नेटवर्क तक भी पहुंचती है।



