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रायसेन # एंबुलेंस VIP ड्यूटी में व्यस्त, तड़पता रहा पत्रकार… 3 घंटे की देरी बनी मौत की वजह!

रायसेन से दिल दहला देने वाली घटना, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

सेटन्यूज़ डेस्क। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। सांची रोड पर हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल पत्रकार दीपक सोनी की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण उनकी जान बचाई नहीं जा सकी।

जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद दीपक सोनी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें भोपाल रेफर कर दिया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। रेफर के बाद करीब 2 से 3 घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार किया गया, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान घायल की हालत लगातार बिगड़ती रही। अंततः मजबूर होकर परिजन उन्हें निजी वाहन से भोपाल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

VIP कार्यक्रम बना बाधा, एंबुलेंस सेवाएं रहीं व्यस्त
बताया जा रहा है कि जिस समय यह हादसा हुआ, उसी दौरान जिले में मुख्यमंत्री मोहन यादव का कार्यक्रम आयोजित था। इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अमले के साथ-साथ एंबुलेंस सेवाओं को भी वीआईपी ड्यूटी में लगा दिया गया था। इसी कारण आपातकालीन स्थिति में भी कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। अस्पताल प्रशासन ने भी स्वीकार किया कि सभी एंबुलेंस व्यस्त थीं और तत्काल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई।

पत्नी की बाहों में टूटी सांसें, परिवार में मातम
परिजनों के मुताबिक, समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से दीपक सोनी की हालत लगातार बिगड़ती गई। भोपाल पहुंचने के बाद इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि अंतिम समय में वे अपनी पत्नी की बाहों में थे, जिसने इस पूरे मामले को और भी भावुक और दर्दनाक बना दिया।

परिजनों का आरोप—यह लापरवाही नहीं, व्यवस्था की विफलता
घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती, तो दीपक सोनी की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बड़ा सवाल—क्या VIP ड्यूटी के आगे आम आदमी की जान सस्ती?
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वीआईपी कार्यक्रमों के चलते आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली जा रही है? क्या आपातकालीन सेवाओं का प्राथमिक उद्देश्य बदलता जा रहा है? स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक जवाबदेही पर अब गंभीर बहस की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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