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(जबलपुर) अघोषित बिजली कटौती से जनता बेहाल, हर घंटे ट्रिपिंग ने बढ़ाई मुसीबत, सरकार के दावों पर उठे सवाल

भीषण गर्मी में बिजली संकट ने तोड़ी लोगों की सहनशक्ति, शहर से गांव तक हाहाकार

सेटन्यूज़, जबलपुर। मध्यप्रदेश की संस्कारधानी Jabalpur इन दिनों अघोषित बिजली कटौती और लगातार पावर ट्रिपिंग की गंभीर समस्या से जूझ रही है। भीषण गर्मी के बीच घंटों बिजली गुल रहने और हर कुछ मिनटों में ट्रिपिंग होने से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। शहर के कई इलाकों में दिन और रात दोनों समय बिना सूचना बिजली काटे जाने से लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय मोहल्लों तक बिजली विभाग और सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है।

राज्य सरकार और बिजली कंपनियां लगातार बेहतर बिजली आपूर्ति के दावे करती रही हैं, लेकिन जबलपुर के नागरिक इन दावों को खोखला बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में जब सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होती है, उसी समय सबसे अधिक कटौती और ट्रिपिंग शुरू हो जाती है। कई इलाकों में रातभर बिजली की आंखमिचौली चल रही है, जिससे बुजुर्ग, बच्चे और मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं।

ओवरलोडिंग और पुराने सिस्टम ने बढ़ाई परेशानी
ऊर्जा विशेषज्ञों और विभागीय सूत्रों के अनुसार गर्मी बढ़ने के साथ एसी, कूलर और अन्य उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे बिजली नेटवर्क पर भारी दबाव पड़ा है। कई ट्रांसफार्मर और केबल निर्धारित क्षमता से ज्यादा लोड झेल रहे हैं। इसी वजह से बार-बार फॉल्ट और ट्रिपिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कई स्थानों पर गुणवत्ताहीन और पुरानी केबलें गर्म होकर शॉर्ट सर्किट कर रही हैं, जिसके चलते घंटों बिजली बाधित हो रही है।

कॉलोनियों में रातभर जागने को मजबूर लोग
शहर के अधारताल, गढ़ा, रांझी, गोहलपुर, मदनमहल, एसबीआई कालोनी, उखरी रोड़, विजय नगर, कमानिया गेट, बड़ा फुहारा, छोटा फुहारा, दमोह नाका सहित कई इलाकों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि हर आधे घंटे में बिजली ट्रिप हो रही है। रात में कई बार घंटों बिजली गायब रहने से लोग घरों के बाहर बैठने और छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। पानी सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है क्योंकि मोटर और पंप समय पर नहीं चल पा रहे।

व्यापार, पढ़ाई और अस्पताल सेवाएं भी प्रभावित
लगातार बिजली कटौती का असर अब कारोबार और शिक्षा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से मशीनें बंद हो जाती हैं और काम प्रभावित होता है। वहीं छात्र गर्मी और बिजली संकट के कारण पढ़ाई नहीं कर पा रहे। कई निजी क्लीनिक और छोटे अस्पताल भी जनरेटर के सहारे काम चला रहे हैं, जिससे खर्च बढ़ गया है।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
जबलपुर में बिजली संकट को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। कई नागरिकों ने वीडियो और पोस्ट शेयर कर बिजली विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं मिल रहा और कॉल सेंटर पर फोन तक नहीं उठाए जा रहे।

तकनीकी सुधार और प्री-मानसून मेंटेनेंस के दावे
बिजली विभाग का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण अचानक लोड बढ़ा है, जिसकी वजह से तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। विभाग द्वारा प्री-मानसून मेंटेनेंस और तकनीकी उन्नयन के कार्य किए जाने का दावा किया जा रहा है ताकि ट्रिपिंग और कटौती को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि आम जनता का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब तक राहत नजर नहीं आ रही।

प्रदेशभर में बिजली संकट बना बड़ी चुनौती
सिर्फ जबलपुर ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और देश के कई हिस्सों में इस समय बिजली संकट गंभीर रूप लेता दिख रहा है। सीहोर, छतरपुर और अन्य जिलों में भी अघोषित कटौती के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर चुके हैं। कई जगहों पर चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन तक देखने को मिले हैं।

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